मुख्यमंत्री जी, गाय व बछड़ों को बचाने की मुहिम में अवैध बूचड़खानों व मीट की दुकानें तो बंद करा दीं, लेकिन फसलों को बचाने के लिए गोशालाओं में बंद सैकड़ों गायों का आखिर क्या होगा? भूख-प्यास व बीमारी से तड़प रही ये गायें हर दिन मौत के मुहाने में जा रही हैं। किसानों ने जैसे-तैसे इन्हें चंदाकर और आपसी सहयोग से दो माह तक खिलाया।
लेकिन अब किसानों के पास भी चारे-भूसे की व्यवस्था नहीं है। प्रशासन ने गोशाला में बंद गायों की मदद को लेकर पहले ही हाथ खड़े कर दिए हैं। अतर्रा ग्रामीण के चौरिहन पुरवा में किसानों ने तीन माह पहले अपनी फसलों को बचाने के लिए आसपास की करीब-करीब 300 गाय-बछड़े गोशाला बनाकर बंद कर दिया। गोशाला संरक्षक शंभू प्रसाद त्रिपाठी के मुताबिक क्षेत्र में सैकड़ों अन्ना गाय व बछड़ों की वजह से किसानों को फसल बचाना मुश्किल हो रहा था। तमाम किसानों ने फसलों की सुरक्षा को कटीले आरीदार तार लगा रखे थे।