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ये क्या घड़ी आई, गोशाला बनी ‘बूचड़खाना’ और भूख ‘कसाई’

Tue, 28 Mar 2017 02:20 PM IST
मृत्युंजय द्विवेदी, अमर उजाला, बांदा

सार

- अस्थाई गोशालाओं में बंद गायों के हालात बहुत दयनीय
- दो महीने से चंदा जुटा गायों का पेट पाल रहे थे किसान
- 30 गाय और बछड़े भूख से तड़पकर पहले ही मर चुके हैं
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मुख्यमंत्री जी, गाय व बछड़ों को बचाने की मुहिम में अवैध बूचड़खानों व मीट की दुकानें तो बंद करा दीं, लेकिन फसलों को बचाने के लिए गोशालाओं में बंद सैकड़ों गायों का आखिर क्या होगा? भूख-प्यास व बीमारी से तड़प रही ये गायें हर दिन मौत के मुहाने में जा रही हैं। किसानों ने जैसे-तैसे इन्हें चंदाकर और आपसी सहयोग से दो माह तक खिलाया।
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लेकिन अब किसानों के पास भी चारे-भूसे की व्यवस्था नहीं है। प्रशासन ने गोशाला में बंद गायों की मदद को लेकर पहले ही हाथ खड़े कर दिए हैं। अतर्रा ग्रामीण के चौरिहन पुरवा में किसानों ने तीन माह पहले अपनी फसलों को बचाने के लिए आसपास की करीब-करीब 300 गाय-बछड़े गोशाला बनाकर बंद कर दिया। गोशाला संरक्षक शंभू प्रसाद त्रिपाठी के मुताबिक क्षेत्र में सैकड़ों अन्ना गाय व बछड़ों की वजह से किसानों को फसल बचाना मुश्किल हो रहा था। तमाम किसानों ने फसलों की सुरक्षा को कटीले आरीदार तार लगा रखे थे।

 
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इनमें कटकर गाय-बछड़े मौत के मुहाने में समा रहे थे। फसलें अलग सफाचट हो रही थीं। किसानों ने मिलकर उनके खेत में अस्थाई गोशाला बनवाई। इसमें करीब 300 अन्ना गाय व बछड़ों को कैद किया गया। तहसील प्रशासन व पशु पालन विभाग से गायों के चारा-भूसा की फरियाद की गई। लेकिन कोई असर नहीं हुआ। किसान गोशाला में कैद गायों को बचाने के लिए आपसी चंदा कर उनका दो माह पेट भरा। लेकिन अब उनके पास भी कुछ नहीं बचा। नतीजे में करीब 30 गाय और बछड़े भूख से तड़पकर मर गए। कई गायें बीमारी की चपेट में हैं।

इस मुद्दे को ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से उठाया। पशु चिकित्सकों की टीम पशुओं का इलाज किया, लेकिन भूख से बचाने के लिए प्रशासन के कान में जूं नहीं रेंगी। अब मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी द्वारा अवैध बूचड़खाने व मीट की दुकानें बंद कराने की मुहिम के बाद किसानों में उम्मीद जगी है। किसानों का कहना है कि बूचड़खाने तो बंद हो गए, लेकिन कसाइयों के हाथों व भूख से हो रहीं मौतों से इन पशुओं को कैसे बचाया जाए? किसान सुधीर ने कहा कि अन्ना पशुओं का शासन-प्रशासन के पास कोई उपाय नहीं है। यह बेरोजगारी का सबसे बड़ा अभिशाप है।

यहां भी 500 गायों का जीवन खतरे में बांदा। बड़ोखर ब्लॉक के अछरौड़ गांव में भी अस्थाई गोशाला बनाकर किसानों ने करीब 200 गायों को बंद कर रखा है। ऐसे ही खप्टिहाकलां (पैलानी) में भी अस्थाई गोशाला में 300 से ज्यादा गायें-बछड़े भूख से बिलबिलाकर दम तोड़ रहे हैं। गोरक्षा का बीड़ा उठाने वाले हिंदू युवा वाहिनी कार्यकर्ता हों या अन्य संगठन। प्रशासन की तरह ये भी इन अन्ना जानवरों को लेकर संवेदनहीन हैं।

अतर्रा के उप जिलाधिकारी गौरव शुक्ला ने बताया जल्द होगा इंतजाम ‘गोशाला में बंद गाय-बछड़ों की सुरक्षा व चारा-भूसा के इंतजाम के लिए प्रशासन प्रयासरत है। उन्होंने अभी नया चार्ज लिया है। जल्द ही, जिला प्रशासन को पत्र भेजकर गोशाला में बंद गायों के लिए व्यवस्था कराई जाएगी।’
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