नौकरी पेशा लोगों के खाते में सैलरी आते ही करेंसी की किल्लत फिर से शुरू हो सकती है। लगभग सभी प्रतिष्ठानों में एक से 10 तारीख के बीच खातों में सैलरी पहुंच जाती है। यदि करेंसी की सप्लाई और एटीएम की यही स्थिति रही तो महीने की शुुरुआत में बैंकों में फिर से लोड बढ़ सकता है। एसबीआई के अधिकारियों ने रिजर्व बैंक के समक्ष यह चिंता जाहिर कर दी है।
कानपुर शहर के एक दर्जन से अधिक सरकारी और इतने ही प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के पास कर्मचारियों की सैलरी की डिमांड भेज दी है। एसबीआई के चीफ मैनेजर सौरभ कपूर ने रिजर्व बैंक के अधिकारियों को बताया कि आर्मी, एयरफोर्स, डीएमएसआरडी, रेलवे समेत अन्य विभागों में सैलरी का टाइम आ गया है। इसके अलावा अन्य प्रतिष्ठानों के भी विभिन्न बैंकों में सैलरी एकाउंट हैं। सभी को एक से 10 तारीख के बीच घरेलू खर्च के लिए कुछ नकदी की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में बैंकों और एटीएम बूथों पर फिर से भीड़ उमडे़गी।
इससे निपटने के लिए बैंकों ने अनुमानित बजट रिजर्व बैंक को भेज दिया है। अनुमान के मुताबिक शहर भर में करीब चार लाख लोगों के पास सैलरी एकाउंट है। औसत सैलरी 20 हजार रुपये भी मान ली जाए तो करीब पहले सप्ताह करीब एक हजार करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी। सिर्फ शहर भर के लिए यह बड़ी रकम है। इस तरह से रिजर्व बैंक के रीजनल कार्यालय के अधीन यूपी और उत्तराखंड के 61 जिले आते हैं। समय पर इतनी भारी मात्रा में करेंसी उपलब्ध करवा पाना रिजर्व बैंक के लिए आसान नहीं होगा।
रिजर्व बैंक के उप महाप्रबंधक सुनील द्विवेदी का कहना है, करेंसी की किल्लत नहीं है। आरबीआई के सभी छपाई खाने तेजी से काम कर रहे हैं। कानपुर में पांच सौ की पर्याप्त करेंसी पहुंच चुकी है, जिसे उतनी ही तेजी से सभी बैंकों और एटीएम में सप्लाई किया जा रहा है। पांच सौ की करेंसी न आने से ही नोट की किल्लत थी।