कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में सत्र 2025-26 में विभागों को शोध पर और काम करना होगा। शोध कार्यों में अब खानापूर्ति नहीं चलेगी। आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के शोध कार्यों को पूरा करने के लिए विभाग हर संभव मदद करेगा।
यह निर्देश विवि के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने बुधवार को सभी विभागाध्यक्षों के साथ बैठक कर दिए। पिछले साल जारी की गई एनआईआरएफ और क्यूएस रैंकिंग में शोध कार्यों की वजह से पीछे रहने के बाद विवि प्रशासन ने इस साल इस पर फोकस किया है।
नए सत्र की योजना पर बैठक करते हुए कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने सभी विभागाध्यक्षों से कहा कि अच्छे शोध के लिए अभी से जुट जाएं। विभागों की मॉनिटरिंग के लिए टीम का गठन किया गया है। इसके अलावा एकेडमिक एक्सीलेंस पर भी फोकस करना होगा। शोध समाज का हित करने वाला हो। शोध के नाम होने वाली खानापूर्ति अब नहीं चलेगी।
विभागाध्यक्ष विषय से लेकर उसमें होने वाले कार्यों पर भी गंभीरता से ध्यान दें। जो छात्र शोध के खर्च को वहन करने में सक्षम नहीं है, उनकी मदद विवि की ओर से की जाए। कुलपति प्रो. पाठक ने तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पेटेंट, पब्लिकेशन, प्रोजेक्ट और कंसलटेंसी पर फोकस करने के लिए कहा।
उन्होंने कहा कि शोध के बाद छात्र के प्रोडक्ट को पेटेंट कराने, रिसर्च को अच्छे पब्लिकेशन में पब्लिश करवाने की भी जिम्मेदारी निभानी होगी।बेहतर प्रदर्शन के लिए विभागाध्यक्षों को सौंपा टॉस्क: इस बार भी विवि एनआईआरएफ और क्यूएस रैंकिंग में आवेदन करेगा।
पिछली बार शोध कार्यों में अन्य बिंदुओं के मुकाबले कमजोर होने की वजह से अच्छी रैंक नहीं मिल पाई थी। इस बार बेहतर रैंक लाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। इसमें शोध कार्य प्रमुख भूमिका में है। इसी वजह से सभी विभागाध्यक्षों को यह टॉस्क सौंपा गया है।