कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग ने ग्लोबल रिसर्च-ओरिएंटेड यूटिलिटी प्लेटफॉर्म्स अवेयरनेस स्केल नाम से पैमाना विकसित किया है। यह विश्वसनीय और मान्य है। इससे न सिर्फ शोधार्थियों को कमियां सुधारने में मदद मिलेगी, बल्कि शोध कार्य की गुणवत्ता और दुनिया में पहचान बढ़ेगी।
शिक्षा विभाग के डॉ. विमल सिंह ने बताया कि पैमाने को प्रदेश के 800 पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी छात्रों पर लागू किया गया। इससे शोध कार्य बेहतर होने के साथ उनकी गुणवत्ता में सुधार हो सकेगा। इसे यह जानने के लिए बनाया गया है कि देश के शोधार्थी दुनिया भर के ऑनलाइन शोध-मंच जैसे रिसर्चगेट, गूगल स्कॉलर, स्कोपस आदि के बारे में कितना जानते और उनका उपयोग करते हैं। स्केल के तीन मुख्य आयाम हैं, जिसमें पहला ओरिएंटेशन यानी जानकारी और परिचय। दूसरा यूटिलिटी यानी उपयोगिता और व्यावहारिक अनुभव। तीसरा रिलेवेंस है। इस आयाम से यह पता चलता है कि शोधार्थी इन मंचों को अपने काम के लिए कितना महत्वपूर्ण मानता है।