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ब्रश और रंगों का खेल दिखाते हुए छात्रों ने एेसी पेंटिंग बनाई जिसने भी देखी नजर न हटा पाया

Tue, 25 Sep 2018 02:21 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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छात्राअों को सिखाई चित्रकारी की बारीकियां
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ब्रश और रंगों का खेल दिखाते हुए कानपुर स्थित सीएसजेएम विश्वविद्यालय में छात्रों ने एेसी पेंटिंग बनाई जिसकी खूबसूरती ने सबका मन मोह लिया। यहां चल रहे सात दिवसीय राष्ट्रीय चित्रकार शिविर के दूसरे दिन छात्रों ने एक से बढ़कर एक कई खूबसूरत पेंटिंग बनाईं। छात्रों ने चंद मिनटों में कई खूबसूरत चित्रों का प्रदर्शन किया।
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विवि के फाइन आर्ट्स विभाग और राज्य ललित कला अकादमी की ओर से विवि परिसर में शिविर का आयोजन किया गया है।  आगरा से आए कलाकार अशोक कुमार सिंह ने चाकू से पेंटिंग तैयार की। दिल्ली से आए राष्ट्रीय कला अकादमी के पूर्व चेयरमैन आनंद देव ने छात्र-छात्राओं के पोट्रेट बनाए। देहरादून से आए राजेंद्र निगम ने युवा कलाकारों को कला की बारीकियां समझाईं। नागपुर के रघु नेवारे ने चित्र में टेक्सचर के महत्व को चित्रों के जरिए समझाया। कार्यशाला में कलाकृतियों को देखने विवि के रजिस्ट्रार डॉ. विनोद कुमार सिंह, डॉ. संदीप कुमार सिंह समेत कई शिक्षक आए। इस मौके पर आभूषण व्यवसायी प्रदीप मंगा, प्रो. अभय द्विवेदी, डॉ. पूर्णिमा तिवारी आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम के आयोजक डॉ. बृजेश कटियार ने भी छात्रों को संबोधित किया।

कलाकारों के लिए रोजगार की कमी नहीं : डॉ. आलोक

आनंद देव ने छात्र-छात्राओं के पोट्रेट बनाए
राष्ट्रीय चित्रकार शिविर में शामिल होने आए गवर्नमेंट हमीदिया आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज, भोपाल के प्रोफेसर डॉ. आलोक ने कला में रोजगार की संभावनाओं के बारे में बताया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि कलाकार अगर अच्छा है तो उसे कभी भी रोजगार की कमी नहीं होगी। वह स्वरोजगार के जरिए ही काफी अच्छा मुकाम हासिल कर सकता है। उन्होंने कहा कि कलाकारों को फील्ड में निकलना चाहिए। आजकल इंटरनेट के माध्यम से कलाकार घर बैठे अलग-अलग दृश्य देख लेते हैं और उसे चित्रों में उकेर देते हैं। ऐसे चित्रों में भाव की कमी होती है।

 
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पेंटिंग की होगी ऑनलाइन बिक्री

डेमो पिक
फाइन आर्ट्स विभाग के प्रभारी डॉ. बृजेश कटियार ने बताया कि वह ऐसा प्रपोजल तैयार कर रहे हैं जिसके जरिए छात्रों द्वारा तैयार की गईं खूबसूरत पेंटिंग को बाजार में बेचा जा सके। इसके लिए कुलपति की अनुमति लेकर वेबसाइट तैयार करवाएंगे और छात्रों की पेंटिंग को ऑनलाइन बेचेंगे। इसके अलावा विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर खाली पड़ी दुकान में भी छात्रों द्वारा तैयार किए गए चित्रों को प्रदर्शित किया जाएगा और उसे वहां पर भी बिक्री की जाएगी। इससे छात्रों को आमदनी भी होगी और विश्वविद्यालय का नाम भी होगा। 
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