कानपुर। पौष्टिक टमाटर की प्रजाति काशी और अमन की अब पैदावार भी अधिक होगी। पौधे से इनके अधिक फूल भी नहीं गिरेंगे। सीएसए के शाकभाजी विभाग के विज्ञानी डॉ. राजीव ने नई तकनीक से इनकी उपज बढ़ा दी है। डॉ. राजीव का कहना है कि विश्व स्तर पर न्यूट्रीशन सिक्योरिटी को लेकर चले रहे अभियान में यह भी एक योगदान है। नई तकनीक से काशी और अमन टमाटर की उपज में 31 फीसदी इजाफा हुआ है।
इस तकनीक में ग्रोथ हार्मोंस का प्रयोग किया गया। न्यूट्रीशन सिक्योरिटी के लिए एक व्यक्ति के लिए 400 ग्राम सब्जियों का सेवन जरूरी है। इसमें सलाद आदि भी शामिल हैं लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन के सर्वे के मुताबिक एक व्यक्ति 200 से 250 ग्राम तक ही सब्जियां उपलब्ध हैं। इस जरूरत को पूरा करने के लिए सब्जियों का उत्पादन बढ़ाए जाने की जरूरत है। डॉ. राजीव ने बताया कि अमन और काशी टमाटर की प्रजातियां वाराणसी की हैं। सीएसए में इनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाई गई है। नई तकनीक अपनाए जाने पर इनके फूल न के बराबर झड़ते हैं। इससे पौधे पर फल अधिक आते हैं।
उन्होंने बताया कि तीन साल के शोध में यह तकनीक विकसित की गई। इसमें टमाटर के पौधों पर जिबरेलिक एसिड ग्रोथ हार्मोंस का छिड़काव किया जाता है। इससे फूल नहीं झड़ते। इसके अलावा पत्तियों पर छिड़काव से मिट्टी में बोरान, कॉपर, जिंक की कमी का दुष्प्रभाव पौधे पर नहीं आता है। इस तकनीक से विकसित टमाटर का जब परीक्षण किया गया तो उसमें जिंक की मात्रा 12 फीसदी तक बढ़ी मिली। इसके अलावा उत्पादन में 28 से 31 फीसदी तक वृद्धि हुई है। काशी और अमन टमाटर में विभिन्न विटामिन के अलावा लाइकोपिन अधिक मिला। इससे मानव शरीर का इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता है।
डॉ. राजीव ने बताया कि अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (सब्जी फसल) के तहत काशी और अमन टमाटर की उपज बढ़ाने की तकनीक को राष्ट्रीय स्तर पर अनुमोदित किया गया। उन्होंने बताया कि 20-22 फरवरी श्रीकोंडा लक्ष्मण तेलांगना बागवानी विश्वविद्यालय, हैदराबाद में हुई 44वीं वार्षिक समूह बैठक में तकनीक का अनुमोदन किया गया।