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महोबा: इंद्रकांत मामले में शामिल पूर्व थानाध्यक्ष की बर्खास्तगी रद्द, इसलिए लिया गया यह निर्णय

Tue, 14 Sep 2021 10:14 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा

सार

एसपी को छोड़कर सभी आरोपी जेल में हैं। तत्कालीन थानाध्यक्ष व सिपाही अरुण यादव को बर्खास्त किया गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने बर्खास्तगी के विरुद्ध थानाध्यक्ष देवेंद्र कुमार शुक्ला की याचिका मंजूर करते हुए आदेश दिया है।
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इंद्रकांत त्रिपाठी की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कबरई के क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी मौत के मामले में फरार चल रहे एक लाख के इनामी एसपी मणिलाल पाटीदार के साथ मुकदमे में शामिल पूर्व थानाध्यक्ष कबरई देवेंद्र कुमार शुक्ला की इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी रद्द कर दी है।
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हाईकोर्ट ने दरोगा की बर्खास्तगी से पहले जांच न करने और अपना कारण स्पष्ट न कर पाने पर यह निर्णय दिया। गौरतलब है कि कबरई के क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी ने 7 सितंबर 2020 को सोशल मीडिया में वीडियो वायरल कर तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार पर छह लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था।

आठ सितंबर को इंद्रकांत गले में गोली लगने से कार में घायल मिले थे,13 सितंबर को कानपुर में उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस मामले में तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार, तत्कालीन थानाध्यक्ष कबरई देवेंद्र कुमार शुक्ला, सिपाही अरुण यादव व दो व्यापारियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मामला दर्ज किया था।
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एसपी को छोड़कर सभी आरोपी जेल में हैं। तत्कालीन थानाध्यक्ष व सिपाही अरुण यादव को बर्खास्त किया गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने बर्खास्तगी के विरुद्ध थानाध्यक्ष देवेंद्र कुमार शुक्ला की याचिका मंजूर करते हुए आदेश दिया है।

उन्होंने देवेंद्र शुक्ला की बर्खास्तगी रद्द कर दी है। याची के वरि. अधिवक्ता विजय गौतम, अतिप्रिय गौतम व विनोद कुमार मिश्रा ने पैरवी की। बताया कि  आइजी चित्रकूट धाम बांदा ने 13 अक्तूबर 2020 को 1991 की नियमावली के नियम 8 (2) (बी) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कर सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट द्वारा प्रतिपादित कानून की अनदेखी कर बिना यह बताए कि आरोपों की जांच कराना क्यों संभव नहीं है, सीधे बर्खास्त कर दिया था। अधिवक्ता का कहना था कि बर्खास्तगी आदेश गलत था।
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