कानपुर रेल हादसा एक बड़ा सफल आतंकी ऑपरेशन था। पुखरायां के पास रेलवे ट्रैक को बम से उड़ाया गया था। ऐसे माना जा रहा है कि इसके सबूत रेलवे मंत्रालय और जिले की पुलिस ने छुपा लिए थे।मीडिया के सामने इन्हें नहीं खोला गया। अंदर ही अंदर एटीएस और खुफिया एजेंसी के साथ हादसे की जांच पड़ताल की जा रही थी।
सनसनीखेज खुलासा
पिछले साल नवंबर के महीने में कानपुर में हुए भीषण ट्रेन हादसे के बारे में बिहार पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। बिहार पुलिस के मुताबिक कानपुर रेल हादसा असल में आतंकी साजिश थी, जिसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अंजाम दिया था।
70 हजार के बदले रेल हादसा करना था
बिहार में छह लोगों की गिरफ्तारी और कानपुर रेल हादसे में साजिश की खबर सामने आ रही है। मुंबई में पिछले दिनों वसंत कुमार नाम के युवक ने रेल हादसे करवाने के लिए बनारस में ट्रेनिंग दिए जाने की सूचना दी थी। जौनपुर निवासी वसंत के मुताबिक, उसे पटना से सुरेश नाम के शख्स ने संपर्क कर 70 हजार रुपये कमाने का लालच दिया था। बदले में उसे रेल हादसा करवाना था।
उस रात संतोष सो नहीं सका
वसंत के मुताबिक 26 और 27 दिसंबर 2016 को दी गई उस ट्रेनिंग के दौरान साथ में ट्रेनिंग कर रहे विनोद और संतोष ने नवंबर में कानपुर में हुए रेल हादसे को अपना सफल ऑपरेशन बताया। बदले में उन्होंने सुरेश से 70 हजार रुपये मिलने का दावा भी किया था। वसंत के मुताबिक, उस रात वो सो नहीं सका और वहां से भागकर मुंबई आ गया। यहां आकर उसने कुर्ला में बीजेपी के दफ्तर में जाकर सारी जानकारी दी। वहां मौजूद जोनल रेलवे उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति के सदस्य सुभाष गुप्ता ने रेलवे के SIB स्टाफ को सूचित किया, जिसके बाद आरपीएफ ने खुद भी उससे पूछ्ताछ की और एटीएस को भी सूचित किया।
नेपाल से मिली थी रकम, मोती ने बम से उड़ाई पटरी
बिहार पुलिस ने मोतिहारी जिले से मोती पासवान नाम के एक शख़्स को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक मोती ने कबूल किया है कि उसी ने कानपुर में रेल पटरी को बम धमाके से उड़ाया था। इसके लिए आईएसआई ने उसको नेपाल के रास्ते मोटी रकम भेजी थी। दिल्ली में भी दो आरोपियों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है। कानपुर के पुखरायां में हुए ट्रेन हादसे में 150 लोग मारे गए थे।
कानपुर के बाद मुंबई-दिल्ली लोकल थी टार्गेट
बिहार की पूर्वी चंपारण पुलिस के खुलासे के बाद अब यह सवाल उठने लगे हैं कि अजमेर-सियालदह ट्रेन हादसे के पीछे भी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ था या नहीं। चंपारण पुलिस ने यह भी सनसनीखेज खुलासा किया है कि दुबई में बैठे शमसुल होदा ने अपने लोगों के जरिये इन घटनाओं को अंजाम दिया था। कानपुर के बाद मुंबई और दिल्ली लोकल ट्रेन इनके टार्गेट पर थी।
गणतंत्र दिवस के पहले बड़ी साजिश की थी योजना
डीजीपी मुख्यालय ने सभी जिलों और रेलवे को इनपुट मुहैया कराकर आगाह किया था कि गणतंत्र दिवस के पहले रेलवे लाइन को नुकसान पहुंचाकर बड़ा रेल हादसा किया जा सकता है।
कानपुर नगर और कानपुर देहात की पुलिस एक्टिव
रेल हादसों के पीछे आतंकी साजिश होने की बात खुलकर सामने आने के बाद कानपुर महानगर और देहात की पुलिस पहले से भी ज्यादा एक्टिव हो चुकी है। बिहार पुलिस को वीडियो कॉन्फ्रेंन्सिंग के जरिये कॉन्टेक्ट कर हादसे से संबंधी पूरी डिटेल प्वाइंट टू प्वाइंट दी जा रही है। सूत्रों का यह भी कहना है कि कानपुर देहात के एक पुलिस अधिकारी को पुखरायां और रूरा हादसे के सबूतों के साथ बिहार भेजा गया है।
आईएसआई से तो नहीं जुड़े नकली नोट मामले के तार!
पुखरायां कस्बे में पकड़े गए नकली नोटों के मामले में कहीं आईएसआई के एजेंटों का हाथ तो नहीं है, जो विधानसभा चुनाव में नकली नोट खपाने की तैयारी में हों। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान इटावा में नकली नोटों समेत पकड़े गए दो युवकों से ऐसे संकेत मिले थे। चार जनवरी की रात भोगनीपुर पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने मीरपुर गांव में नकली नोट छापने का काला धंधा पकड़ा था। 83 लाख रुपये के नकली दो-दो हजार रुपये और छापने के उपकरण बरामद किए गए थे। इस मामले में तीन लोगों को मौके पर और दो लोगों को बाद में नकली नोटों समेत पकड़ा गया था। आरोपियों के मुताबिक 90 लाख रुपये के नकली नोट बाजार में खपाये जा चुके थे। गौरतलब है कि 5 जनवरी 2012 को इटावा में एसओजी टीम ने दो युवकों को पकड़ा था, उनके जूतों से एक लाख रुपये के नकली नोट पकड़े गए थे। सभी नोट एक-एक हजार रुपये के थे, तब इटावा के तत्कालीन एसएसपी राजेश मोदक ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के जरिये जाली भारतीय मुद्रा के संचरण की जानकारी चुनाव आयोग और रिजर्व बैंक को दी थी। कोतवाली के एसएसआई अनुप कुमार दुबे ने बताया कि क्राइम ब्रांच की टीम जांच कर रही है। जल्द ही इस मामले में शामिल अन्य लोग भी पकड़े जाएंगे और वारदात का पूरी तरह खुलासा हो जाएगा।