जीएसवीएम मेडिकल कालेज कांड पर प्रदेश सरकार के रवैये को देखते हुए मेडिकल स्टूडेंट्स और टीचर्स ने हलफनामा देकर कहा कि इस मामले में वे कोई कार्रवाई नहीं चाहते हैं । ऐसा ही आरोपी पुलिसकर्र्मियों ने भी पुलिस द्वारा मेडिकल स्टूडेंट्स के खिलाफ लिखाई गई एफआईआर के संदर्भ में लिखकर दे दिया है।
इन हलफनामों के आधार पर एसआईटी ने फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगा इसे कोर्ट में दाखिल कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी है। रिपोर्ट में लिखा गया है कि मेडिकल स्टूडेंट्स, टीचर्स ने हलफनामा देकर कह दिया है कि वे लोग इस प्रकरण में कोई कार्रवाई नहीं चाहते हैं।
मेडिकल कालेज प्रिंसिपल ने भी यही हलफनामा दिया है। इधर, आरोपी पुलिसकर्मियों ने भी यही बात हलफनामा देकर कही है। सूत्रों का कहना है कि मामले में दर्ज आठ एफआईआर के वादी और प्रतिवादी दोनों पक्षों में एसआईटी की जांच के दौरान हलफनामा देकर यही बात लिखकर दे दी है।
एसआईटी ने जांच पूरी करके इस चर्चित प्रकरण में फाइनल रिपोर्ट लगा दी है। इतना ही नहीं एफआर को कोर्ट में दाखिल भी कर दिया गया है। एसएसपी शलभ माथुर ने मेडिकल कालेज प्रकरण की जांच रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल किए जाने की पुष्टि की है।
उनका कहना है कि अब कोर्ट पर निर्भर करता है कि एसआईटी की रिपोर्ट स्वीकार करे या दुबारा जांच कराए। इस प्रकरण में कुल आठ एफआईआर दर्ज हुईं थी। इनमें एक एफआईआर पुलिस कर्मियों केखिलाफ भी हुई थी। इस कांड को लेकर देश भर के सरकारी और प्राइवेट डॉक्टर सड़कर पर आ गए थे।
सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में कामकाज बंद हो गया था। हाईकोर्ट ने स्वत: मामले को संज्ञान में लेते हुए पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद सरकार ने जस्टिस चौहान की अध्यक्षता में गठित आयोग ने जांच की थी।
एडीजी जीएल मीणा को जांच के लिए भेजा गया था। कोर्ट के निर्देश पर प्रकरण की जांच के लिए एसआईटी गठित हुई थी। डिप्टी एसपी जितेंद्र श्रीवास्तव की अगुवाई वाली एसआईटी ने करीब एक साल तक प्रकरण की जांच की थी।
मुझे भी स्टूडेंट्स की ओर से हलफनामा दाखिल होने की जानकारी मिली है। मैंने इसे देखा नहीं है लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि स्टूडेंट्स के हित में यदि चीजें खत्म हो जाएं तो इसके लिए सब तैयार होंगे। सभी चाहते भी हैं कि मामले खत्म हो जाएं।
प्रशासन की ओर से इसके लिए कोशिश भी की जा रही थी। केस वापस लेने के लिए मुझ पर कोई दबाव कभी नहीं बनाया गया है। मैं सोमवार को कचहरी गया था। केसों के संबंध में अपने वकीलों से मशविरा किया हूं। मेरी तरफ से कोई हलफनामा नहीं दिया गया है। मेरा काम तो सेकेंड स्टेज पर आएगा। यह जरूर है कि मेरे एप्लीकेशन पर मुकदमा दर्ज हुआ लेकिन पीड़ित तो स्टूडेंट्स ही थे।
प्रो. नवनीत कुमार, प्रिंसिपल, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज
मुझे पक्की सूचना है कि जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज केे प्रिंसिपल ने दायर केस नंबर 48 को वापस ले लिया है। 24 में से 11 स्टूडेंट्स पर दबाव डालकर हलफनामा दाखिल कराया गया है लेकिन उनकी जानकारी में अभी 13 स्टूडेंट्स ने न तो कोई हलफनामा दाखिल किया है और न ही रुपये लिए हैं। जिन्होंने हलफनामा नहीं दाखिल किया है उन पर जबरदस्त दबाव बनाया जा रहा है। कई फेल भी कर दिए गए हैं। स्टूडेंट्स को कई तरीके से परेशान किया जा रहा है।
प्रो. आरती लाल चंदानी, पूर्व विभागाध्यक्ष मेडिसिन, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज