प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही रेप के आरोपी पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति की गिरफ्तारी के बाद कानपुर के हिस्ट्रीशीटर सपा नेता महताब आलम की भी तलाश तेज हो गई है। करीब एक महीने पहले जाजमऊ में महताब की निर्माणाधीन इमारत ढहने से 10 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद से वह फरार है। सपा नेता को बचाने वाले कुछ अफसर भी नई सरकार के नेताओं और अफसरों के रडार पर हैं। इनके और सपा नेता के रिश्तों को गुपचुप तरीके से खंगाला जा रहा है।
संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज
कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) के विशेष कार्याधिकारी डीडी वर्मा ने महताब और दो ठेकेदार के खिलाफ गैर इरादतन हत्या समेत कई संगीन धाराओं में चकेरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। महताब के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी है। पुलिस शहर से लेकर कोलकाता तक छापामारी करने का दावा कर रही है लेकिन कोई सुराग नहीं लगा है। ऐसा ही गायत्री प्रजापति के मामले में भी लखनऊ पुलिस ने किया था। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के बाद पुलिस सक्रिय हुई। मंगलवार को लखनऊ पुलिस ने गायत्री प्रजापित के बेटे अनुराग और भतीजे सुरेंद्र को उठाया था। इसके 24 घंटे के भीतर बुधवार को गायत्री को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के एक बड़े अफसर का कहना है कि सत्ता के दबाव में कुछ अफसर महताब की गिरफ्तारी को लेकर लचीला रवैया अपना रहे थे। अब महताब और ठेकेदारों की तलाश तेज कर दी गई है। आरोपियों के परिवार के लोगों पर भी दबाव बनाया जा रहा है।
मृतकों को मिलेगा 10 लाख मुआवजा
जाजमऊ में निर्माणाधीन इमारत ढहने के मामले में शासन ने मुआवजे का एलान किया है। डीएम कौशलराज शर्मा ने बताया कि हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये, घायलों को 50-50 हजार रुपये मुआवजा दिया जाएगा। इस बारे में 10 मार्च को शासन का आदेश मिल चुका है। जल्द ही मृतकों और घायलों के परिजनों को मुआवजा राशि का चेक दिया जाएगा।