यूपी में फतेहपुर जिले के चौडगरा में सेवानिवृत्त दरोगा के खाते से साइबर अपराधियों ने 19 लाख की रकम पार कर दी। खाते से रुपये निकलने की जानकारी होते ही दरोगा के होश उड़ गए। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज की है।
कल्यानपुर थाना क्षेत्र के मकसूदनखेड़ा निवासी फतेहबहादुर 31 जुलाई को हरदोई जिले के पतदेवरा थाने से सेवानिवृत्त हुए थे। उनका बैंक खाता एसबीआई बिंदकी रोड चौडगरा में है। उन्होंने बताया कि 21 अगस्त को करीब 11 बजे दोपहर को मोबाइल पर एक फोन आया।
फोन करने वाला बोला कि वह कुलदीप सिंह फतेहपुर ट्रेजरी ऑफिस का बाबू बोल रहा हूं। उनके रुपये खाते में ट्रांसफर होने हैं। इसके लिए पासबुक, एटीएम कार्ड और सेवानिवृत्त का सर्टिफिकेट की जानकारी चाहिए। उन्होंने सारी जानकारी फोन करने वाले को दे दी।
उसके बाद दो बार मोबाइल ओटीपी आया। उन्होंने जल्दबाजी में ओटीपी नंबर फोन करने वालेे को बता दिया। उनके खाते से एक लाख 84 हजार 999 रुपये निकल गए। वह सीधे बैंक पहुंचे और बैंक मैनेजर को खाता लॉक करने को कहा।
बैंक खाते से रुपये निकलने की जानकारी दी। प्रबंधक ने खाता बंद कर देने की जानकारी दी। उसके बाद बैंक स्टेटमेंट लेकर कल्यानपुर थाने पहुंचे। फतेहबहादुर 24 अगस्त को फिर बैंक पहुंचे और खाता दोबारा खुलवाने के साथ दो लाख रुपये किसी दूसरे खाते में ट्रांसफर कराए।
इसी बीच साइबर ठगों ने उनका खाता बिहार ट्रांसफर कर लिया और 24, 25 अगस्त के बीच खाते से 17 लाख रुपये निकाल लिए। उनका खाता एसबीआई की शाखा भागलपुर प्रांत बिहार में स्थानांतरित किया गया था। बिहार की बैंक शाखा से ही खाते की रकम उड़ाई गई।
दरोगा का आरोप है कि आवेदक की सहमति के बगैर खाता दूसरी जगह स्थानांतरित नहीं हो सकता है। बैंक कर्मियों की दोनों शाखाओं की मिलीभगत से धोखाधड़ी हुई है। सेवानिवृत्त दरोगा का कहना है कि उसका खाता 23 अगस्त को ही स्थानांतरित हो गया। थानेदार अनूप सिंह ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर जांच की जा रही है। बैंक मैनेजर से पूछताछ की गई है। जांच साइबर सेल को भेजी जाएगी।
दो लाख के चक्कर में गए 17 लाख
बैंक मैनेजर राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि फतेहबहादुर ने साइबर क्रिमनलों को सारा डाटा उपलब्ध करा दिया था। वह दोबारा रुपये निकालने आए थे तो मना किया गया था। जब उन्होंने लिखित रूप से दिया तब दोबारा सीज खाता खोला गया था।
इस दौरान साइबर क्रिमनल ने नेट बैंकिंग के जरिए खाता ट्रांसफर कर लिया। अपराधी ने सारी जानकारी पहले से ले रखी थी। मामले की जांच कराई जा रही है। उच्चाधिकारियों को जानकारी देकर खाते से रकम रोके जाने की सिफारिश की गई है।