कानपुर देहात/सरवनखेड़ा। सोमवार को मंगटा गांव पहुंचे सपाइयों के प्रतिनिधिमंडल के काफिले को आरोपी पक्ष की महिलाओं ने रोक लिया। आरोप लगाया कि गांव आने वाले सभी राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि मंडल एक ही पक्ष की बात सुन रहे हैं। उनके साथ भी मारपीट हुई है। पुलिस ने अभी तक उनकी रिपोर्ट तक नहीं लिखी है। सपा नेताओं ने कार्रवाई कराने का भरोसा दिया।
मंगटा गांव में एक जाति विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी और पोस्टर फाड़ने पर 13 फरवरी को दो पक्षों के बीच मारपीट हुई थी। इसमें 26 लोग घायल हुए थे। पुलिस ने 28 नामजद और 20 अज्ञात पर रिपोर्ट दर्ज कर अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। घटना के बाद से ही राजनैतिक दलों के प्रतिनिधिमंडल गांव पहुंच रहे हैं। सोमवार को सपा नेता और अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष सर्वेश आंबेडकर के नेतृत्व में छह सदस्यीय दल पहुंचा। यह लोग पीड़ित पक्ष के लोगों से मुलाकात करके लौट रहे थे। तभी आरोपी पक्ष की महिलाओं ने उन्हें रोक लिया। महिलाओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने एक पक्षीय कार्रवाई की है। राजरानी ने कहा कि हर दल वोट के चक्कर में न्याय की बात नहीं कह रहा है। महिलाओं ने बताया कि घटना के दिन एसओ गजनेर ने थाने से पहले ही लोगों को घेरकर वापस कर दिया था। इसके बाद दूसरे दिन एसपी के यहां शिकायत दर्ज कराने जाने के दौरान मोहाना गांव के पास से पकड़ कर वापस गांव भेजा गया था। पुलिस ने शिकायत दर्ज नहीं की। सिर्फ एक ही पक्ष की बात सुनी। इसके बाद गांव में फोर्स तैनात कर घरों में दबिश देकर उत्पीड़न शुरू कर दिया गया। इससे पुरुष सदस्य फरार हो गए। मंगटा गांव की विजय नंदनी ने सपाइयों को बताया कि इकलौता बेटा विक्रम सिंह को आरोपी बना दिया गया है। घटना के वक्त वह बहन की चौथी ले जाने के लिए सामान खरीदने नबीपुर गया था। एक दिन पहले गांव में दो पक्षों में विवाद की शुरुआत हुई थी, तो उसने इसकी सूचना पुलिस को दे दी थी। इस पर उसे नामजद कर दिया गया। गांव की मोना सिंह ने बताया कि उसके 70 वर्षीय पिता जगदेव सिंह चौहान साइकिल से मवेशियों के लिए हरा चारा लेने खेत पर गए थे। पुलिस ने उन्हें वहीं से उठाकर जेल भेज दिया। इसके बाद साइकिल अभी तक नहीं मिली। प्रतिनिधि मंडल ने पूरे प्रकरण से राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को अवगत कराने की बात कही। प्रतिनिधि मंडल में श्रीराम पाल, दयाशंकर वर्मा, पूर्व विधायक योगेंद्र पाल सिंह, कमलेश दिवाकर, भूपेंद्र दिवाकर शामिल रहे।
मंगटा गांव जाने वाले लोगों पर प्रशासन ने सख्ती बरतना शुरू कर दिया है। सोमवार को सपा का छह सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल पहुंचा तो गांव से पहले ही एसडीएम आनंद कुमार सिंह व सीओ संदीप सिंह ने रोक लिया। प्रतिनिधि मंडल ने यह भरोसा दिया कि वह कोई ऐसी बात नहीं करेंगे, जिससे माहौल खराब हो। तब उन्हें आगे जाने दिया गया। वहीं उनकी निगरानी में पुलिस लगा दी गई। उनकी बातचीत की रिकार्डिंग कराई गई।
मंगटा में मारपीट के बाद एफआईआर दर्ज कराने में मनमानी करने की भी बात सामने आई है। एक पक्ष के कुछ लोगों ने ऐसे लोगों को भी नामजद कर दिया है, जो मौके पर नहीं थे। सोमवार को एसपी से मिलने आई सीआरपीएफ का जवान जयवीर सिंह की पत्नी फूल कुमारी ने बताया कि पति मथुरा में तैनात हैं। भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए वह एक जनवरी से आठ फरवरी तक छुट्टी लेकर घर आए थे। 9 फरवरी को वह वापस ड्यूटी पर चले गए थे। दस फरवरी को वह ड्यूटी ज्वाइन कर चुके थे। गांव में झगड़ा 13 फरवरी को हुआ इसके बाद भी उनके पति को नामजद कर दिया गया। एसपी अनुराग वत्स ने बताया कि विवेचना के दौरान घटना में शामिल न होने वालों के नाम हटा दिए जाएंगे।
मारपीट में घायल हुए अनुसूचित जाति के 24 लोगों को समाज कल्याण विभाग की ओर से एक-एक लाख रुपये की धनराशि स्वीकृति की गई है। इनके खाते में जल्द ही यह धनराशि भेज दी जाएगी। एसपी ने बताया कि अभी तक घटना में अनुसूचित जाति के 24 लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। समाज कल्याण अधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जन जाति के व्यक्ति को सवर्ण जाति के लोगों द्वारा मारपीट कर घायल करने पर दो लाख रुपये की आर्थिक मदद मिलती है। पचास फीसदी राशि यानी एक लाख रुपये रिपोर्ट दर्ज होने पर और बाकी पचास फीसदी राशि यानी एक लाख रुपये चार्जशीट लगने के बाद दी जाती है। प्रारंभिक जांच पूरी करने के बाद सीओ संदीप सिंह ने सभी घायलों के आधार नंबर व बैंक विवरण जुटा कर पत्रावली जिलास्तरीय समिति के समक्ष प्रस्तुत की। इस पर डीएम की अध्यक्षता वाली समिति ने 24 पीड़ितों की सहायता के लिए 24 लाख रुपये की स्वीकृति दे दी।
युवा एकेडमी की संचालक और समाज सेविका दीपिका सिंह सेंगर ने सोमवार को गांव जाकर दोनों पक्षों से मुलाकात की। उनकी बात सुनीं। बताया कि आरोपी पक्ष की महिलाएं काफी परेशान हैं। पीड़ित पक्ष की मदद लगातार प्रशासन की ओर से हो रही है। आरोपी पक्ष में कई ऐसे लोगों को फंसाया गया है जिनका मारपीट में कोई रोल नहीं है। उन्होंने कहा कि घटना की वजह की जांच गंभीरता से होनी चाहिए। धार्मिक आयोजन में जाति विशेष को गाली देने से मामला भड़का था। इसकी मजिस्ट्रेटी जांच की मांग के लिए वह मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजेंगी।