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हत्या में कानपुर देहात का सबसे बड़ा जुर्माना

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कानपुर देहात। हत्या को दोषियों पर लगाया गया 11 लाख 32 हजार का जुर्माना अभी तक कानपुर देहात में सुनाया गया सबसे बड़ा अर्थदंड है। अधिवक्ताओं के बीच यह सजा चर्चा का विषय बनी रही।
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वर्ष 2013 में कानपुर से माती में कचहरी शिफ्ट हुई थी। तब से जिले के अलावा कानपुर आउटर के थानों की भी यहां सुनवाई होती है। आजीवन कारावास की सजा तो कई मामले में हो चुकी है लेकिन अब तक अभियुक्तों पर पांच लाख से अधिक का अर्थदंड नहीं लगा है। शुक्रवार को जिला जज की कोर्ट में हत्या के मामले में दोषी पाए सभी सात अभियुक्तों पर 11 लाख 32 हजार का अर्थदंड लगाया गया है।
हत्या में दोषी साबित रावेंद्र उर्फ रामू ने जमानत पर बाहर आने के बाद वकालत की पढ़ाई की। एलएलबी करने के बाद उसने माती कचहरी में प्रैक्टिस भी शुरू कर दी थी। वर्ष 2009 में घटना के बाद रामेंद्र जेल चला गया था। जमानत पर बाहर आने के बाद उसने एलएलबी किया। वह साथियों से कहता था कि अपने मुकदमे की पैरवी के लिए कानून की पढ़ाई की है। हालांकि उसकी वकालत काम नहीं आ सकी। कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुना दी।
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मिशन शक्ति अभियान के तहत चिह्नित किए गए मुकदमे का शीघ्र निस्तारण करने के निर्देश सरकार की तरफ से दिए गए थे। जिला शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल ने बताया कि सरकार की मंशा है कि महिला अपराधों से संबंधित मामलों का सबसे जल्द निस्तारण कराया जाए। इसी क्रम में इस मुकदमे को शामिल करके सुनवाई हो रही थी। महिला के साथ हुए अपराध को कोर्ट में स्पष्ट रूप से रखा गया। इस पर दोषियों को सजा सुनाई गई।
कानपुर देहात। घटना के बाद से आरोपी पक्ष पुलिस पर निष्पक्ष विवेचना न करने का आरोप लगाने लगे। उच्चाधिकारियों से कई बार शिकायत के बाद शासन से सीबीसीआईडी से जांच कराने की मांग की। उनकी मांग पर शासन ने जांच की अनुमति दे दी। सीबीसीआईडी ने जांच में आरोपियों को दोषी पाते हुए कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। विशेष लोक अभियोजक सीबीसीआईडी नागेश कुमार दीक्षित ने बताया कि जांच एजेंसी ने पुख्ता साक्ष्य जुटाकर आरोप पत्र दाखिल किया था।
दिन दहाड़े लाठी-डंडा, फरसा से हमला कर घायल करने व गोली मार कर एक व्यक्ति की हत्या के मामले में गवाह पक्षद्रोही हो गए। गवाह बाबूलाल व शांति देवी घटना में घायल हुए थे। पुलिस ने दोनों को गवाह बनाया था। पूर्व में कोर्ट में आकर अभियोजन पक्ष का समर्थन किया। फिर काफी समय बाद बचाव पक्ष ने दोबारा गवाही कराने की मांग की। दोबारा गवाही होने पर दोनों पक्षद्रोही हो गए थे।
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