पाल नगर गोआश्रय स्थल में मौजूद गोवंश।
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कानपुर देहात। गायों का चारा व गो सेवकों का पारिश्रमिक अब सरकारी पत्राचार में फंस गया है। जिम्मेदार डिमांड आने के बाद धन भेजने की बात कह रहे हैं जबकि, आश्रय स्थलों में चारे का संकट हो गया है। गो सेवकों को कई माह से पारिश्रमिक नहीं मिला है।
ग्रामीण क्षेत्र के गो आश्रय स्थल ग्राम पंचायतों के अधीन हैं। प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने पर रुचि नहीं ले रहे हैं। सचिवों के पास कई ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी है, वह आश्रयस्थल की समस्याओं से बेखबर हैं। गोवंश आश्रय स्थल के संचालन के लिए प्रशासकों के खाते भी नहीं खोले गए हैं। गायों के चारे के इंतजाम की फिक्र करने वाला कोई नहीं है। आश्रय स्थल में तैनात गो सेवकों को कई माह से मानदेय नहीं मिला। इसलिए वह भी देखरेख की खानापूरी कर रहे हैं। छुट्टा गोवंश की देखरेख की जिम्मेदारी लिए अफसर नियमों में उलझे हैं। वह धन के उपभोग व डिमांड का इंतजार कर रहे हैं, जबकि गायों को सूखा भूसा खिलाया जा रहा है।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. देवकीनंदन लवानियां ने बताया कि गोवंश आश्रय स्थलों से डिमांड नहीं मिल रही है। डिमांड भिजवाने के लिए सभी एसडीएम को पत्र लिखा गया है। फिलहाल कहीं भी चारा खत्म होने की जानकारी नहीं मिली है।
रसूलाबाद कान्हा गोशाला में बीमार गोवंश।- फोटो : AKBARPUR