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लचर जांच: अपहरण में दो साल से जेल काट रहे हैं चचेरे भाई, पुलिस-एसटीएफ तक युवती की खोज में फेल, जानें मामला

Sun, 11 Feb 2024 04:05 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर

सार

Fatehpur News: कल्यानपुर थाना क्षेत्र में दो साल से लापता युवती के अपहरण के मामले में चचेरे भाई जेल काट रहे हैं। थाना पुलिस से यूपी एसटीएफ तक युवती की खोज में फेल हो गए हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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फतेहपुर जिले में कल्यानपुर थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने तीन साल से लापता 22 वर्षीय अनुसूचित जाति की युवती के अपहरण के मामले में दो साल से रिश्ते में चचेरे भाई जेल काट रहे हैं। उनका चाचा डेढ़ माह पहले जेल से छूटकर आया है। युवती की खोज में लगी थाना पुलिस, यूपी एसटीएफ व अन्य टीमें नाकाम रहीं।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट के मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के बाद मामला फिर एक बार सुर्खियों में आया है। लापता युवती की शादी कानपुर देहात में हुई थी। वह 23 फरवरी 2021 को घर से ससुराल जाने को निकली थी। इसके बाद लापता हो गई थी। उसकी मां ने गांव के रिश्ते में भाई हैप्पी सिंह, राही सिंह पर आरोप लगाया था।

आरोप है कि हैप्पी बेटी को शारीरिक संबंध बनाने और परिवार को नीचा दिखाने की नीयत से ले गया। राही सहयोगी है। पुलिस ने परिवार से गुमशुदगी लिखवा मामले को कूड़े में डाल दिया था। हाईकोर्ट ने मामला संज्ञान में प्रकरण में लेकर तत्कालीन एसपी को तलब किया। इधर, फौरन पुलिस ने मां से तहरीर लेकर आठ माह बाद 10 दिसंबर 2021 को दोनों आरोपियों पर साजिश के तहत युवती के अपहरण, धमकी, गाली गलौज और एससी-एसटी का दर्ज किया।

युवती लापता है और हैप्पी, राही जेल में हैं
पुलिस हैप्पी, राही के अलावा इनके चाचा संजय सिंह को विवेचना दौरान प्रकाश में लाई। विवेचक ने तीनों को जेल भेज दिया। हाईकोर्ट में कार्रवाई दिखाई गई, लेकिन कोर्ट ने हैवियस कार्पस के तहत लापता युवती को लाने का आदेश किया। इस तरह से युवती लापता है और हैप्पी, राही जेल में हैं। डेढ़ माह पहले संजय सिंह को जमानत मिली है।

बड़े अधिकारी तलब होते ही भेजा जेल
युवती के लापता होने के मामले में हाईकोर्ट ने बारी-बारी से पुलिस अधिकारियों को तलब किया। अधिकारी तलबी से पहले ही कार्रवाई का खाका तैयार कर लेते थे। तत्कालीन एसपी की तलबी के दौरान आरोपी जेल गए। इसके बाद तत्कालीन प्रयागराज आईजी डा. राकेश सिंह तलब हुए।

निलंबित पुलिस कर्मी हाईकोर्ट से बहाल हुए
वह 11 अप्रैल 2022 को प्रकरण के संबंध में आए। एसआईटी गठित की। तत्कालीन सीओ योगेंद्र मलिक पर जांच बैठाई। मुकदमे में हीलाहवाली करने वाले गैरजनपद जा चुके इंस्पेक्टर व विवेचक तीन दरोगा निलंबित हुए। थानाध्यक्ष को हटाया गया। निलंबित पुलिस कर्मी हाईकोर्ट से बहाल हुए।

पुलिस ने मद और जेब से 25 लाख खर्च किए
एसआईटी ने जांच के दौरान करीब पांच हजार मोबाइल के सीडीआर पर काम किया। गुजरात, मुंबई, बिहार, कानपुर देहात, कौशांबी में खोजबीन की। युवती की अंतिम लोकेशन गुजरात के सूरत रही है। गुजरात में पुलिस कई महीने डेरा डाले रही। कोरोना काल में होने वाली मौत और 2020 व 2021 के महिलाओं के सारे लावारिस शवों की जांच की।

कर्मियों की जेब जमकर ढीली हुई
पुलिस को कुछ रुपये ही मद से मिलते रहे। बाकी रुपये थाने और कर्मियों ने जेब से खर्च किए। हाईकोर्ट की सख्त निगरानी के दबाव में गैरप्रांतों में खोज के दौरान कर्मियों की जेब जमकर ढीली हुई। अनुमानित खर्च करीब 25 लाख के आसपास आया है।
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परिवार के सदस्यों ने सही प्रताड़ना, नार्को टेस्ट से गुजरे
युवती के परिवार, ससुरालियों और रिश्तेदारों को जांच के दौरान पुलिस की प्रताड़ना झेलनी पड़ी है। पुलिस परिवार के लोगों को सुबह से शाम तक बैठाए रखती थी। लंबी पूछताछ करती। दबाव बनाती रही। घर में सुरक्षा कर्मी भी लगाए गए थे। परिवार के सदस्यों को नार्को टेस्ट तक से गुजरना पड़ा।
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