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38 दिन में पूरी की सुनवाई, छात्रा से दुष्कर्म के आरोपी को उम्रकैद, दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया

Wed, 16 Oct 2019 10:51 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, औरैया
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : गूगल
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औरैया में दुष्कर्म पीड़िता को त्वरित न्याय दिलाने की श्रृंखला में बुधवार को विशेष न्यायाधीश (पॉस्को एक्ट)/एडीजे राजेश चौधरी ने दिबियापुर क्षेत्र के दस वर्षीय चचेरी बहन (छात्रा कक्षा पांच) के साथ दुष्कर्म के आरोपी को घटना के मात्र 38 दिन व 16 कार्य दिवस में सुनवाई पूरी कर दोषी युवक को आजीवन कारावास व दो लाख रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। गौरतलब है कि 29 अगस्त को इसी अदालत ने इसी तरह के एक अन्य मामले में मात्र नौ दिन की सुनवाई में दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाकर प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर चुकी है।
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मामले की अभियोजन की ओर से पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक जितेंद्र सिंह तोमर के अनुसार, रिश्तों को तार-तार करने वाली यह घटना दिबियापुर क्षेत्र के एक गांव की है। वादी ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि नौ सितंबर 2019 की दोपहर को वह अपनी पत्नी के साथ राशन लेने दुकान पर गया था। उसकी 10 वर्षीय पुत्री, जो कि कक्षा पांच की छात्रा भी है, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की कंचौसी शाखा में खाता खुलवाने गई थी।

वहां से लौटते समय जैसे ही वह आरोपी युवक के घर के पास पहुंची तो आरोपी ने पीड़िता को घर में घसीट लिया और उसके साथ दुष्कर्म किया। छात्रा विकलांग  स्कूल पहुंची और रोते हुए घटना बताई। कुछ देर बाद आरोपी युवक भी वादी के पास पहुंचा और रिपोर्ट न लिखवाने की धमकी देने लगा। लोगों के ललकारने वह भाग गया। वादी की तहरीर पर यह मुकदमा थाना दिबियापुर में आरोपी के विरुद्ध लिखा गया।
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पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर मात्र 14 दिन में यानि 23 सितंबर को चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी। विशेष न्यायाधीश (पॉस्को एक्ट) राजेश चौधरी ने मात्र 16 कार्य दिवस में विचारण की कार्यवाही बुधवार को पूरी कर फैसला सुना दिया। आरोपी युवक को आजीवन कारावास व दो लाख अर्थदंड की सजा से दंडित किया।

अधिवक्ता शिवम शर्मा ने बताया कि अर्थदंड अदा न करने पर दोषी को एक वर्ष का साधारण कारावास भुगतना पड़ेगा। कोर्ट ने अर्थदंड की संपूर्ण धनराशि पीड़िता को उसके चिकित्सकीय खर्चों व पुनर्वासन के लिए प्रदान करने का आदेश दिया। सजा सुनाए जाने के बाद युवक को जिला कारागार इटावा भेज दिया गया है। 

दिबियापुर कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार शुक्ला ने बताया कि मामले में उनकी ओर से जांच अधिकारी निर्भय सिंह ने आरोपी युवक की डीएनए रिपोर्ट भी शामिल की थी ताकि आरोपी के बचने की कोई गुंजाइश न रह जाए। साथ ही ेमामले की विवेचना घटना के 14 दिन के अंदर 23 सितंबर को चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी।
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