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25 साल बाद दहेज हत्या के मामले में अदालत का बड़ा फैसला

Tue, 21 Aug 2018 09:15 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

- दहेज हत्या के चार दोषियों को मिली 10 साल कैद
- वर्ष-1988 में हुई थी शादी, 1993 में जलाकर मार डाला था
- घायलावस्था में उर्सला में छोड़कर भाग गए थे ससुरालीजन
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विस्तार
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सत्य कभी छुपता नहीं एक न एक दिन उजागर होकर ही रहता है। अपराध की सजा जरूर मिलती है। ऐसा ही एक बार फिर कानपुर में हुआ है। यहां 25 साल पहले हुई दहेज हत्या के मामले में बड़ी सजा सुनाई गई है। दहेज हत्या के दोषियों को कानपुर के एडीजे प्रथम रजत सिंह जैन ने 10 साल की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर पांच साल का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। ग्वालटोली निवासी अमृतलाल वाजपेयी की पुत्री अमिता उर्फ तोषा की शादी चमनगंज के हलीम रोड निवासी शिवओम पांडेय के साथ 13 फरवरी 1988 में हुई थी। शादी के बाद से ही ससुरालीजन दहेज में 20 हजार रुपये की मांग कर अमिता को प्रताड़ित करते थे। 11 नवंबर 1993 की सुबह लगभग 9 बजे अमिता को घर में ही जला डाला। घायल अवस्था में ससुरालीजनों ने अमिता को उर्सला में भर्ती कराया जहां मजिस्ट्रेट ने अमिता के बयान भी दर्ज किए। बयान के बाद पति शिवओम व अन्य ससुरालीजन फरार हो गए थे। पुलिस ने शिवओम पांडेय के अलावा सभी को पकड़ लिया था। शिवओम का अब तक नहीं पता चल सका है। मंगलवार को चारों अभियुक्तों को जेल भेज दिया गया।
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 नौ पर हुआ था केस
 अमिता के भाई शैलेंद्र ने पति शिवओम पांडेय, ससुर महानंद, जेठ केशवनंद, सम्पूर्णानंद व परिपूर्णानंद तथा जेठानी इंद्रा पाण्डेय, उमा देवी, रीता व भतीजी इला के खिलाफ चमनगंज थाने में दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। एसपीओ केके शुक्ला ने बताया कि अभियोजन ने 8 गवाह पेश किए जबकि बचाव पक्ष की ओर से 5 गवाह पेश किए गए। साक्ष्य के अभाव में इला और रीता को दोषमुक्त करार दिया गया। दो की मौत हो चुकी है। 
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25 साल चला मुकदमा

डेमो पिक
अमिता की हत्या 1993 में हुई थी। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। लेकिन बचाव पक्ष के दांवपेच और अदालती कार्रवाई में मुकदमा ऐसा उलझा कि न्याय मिलने में 25 साल लग गए।

सजा पाने वाले सभी बुजुर्ग
मुकदमे में दोषी पाए गए जेठ सम्पूर्णानंद 72 साल, परिपूर्णानंद 69 साल, जेठानी इन्द्रा पाण्डेय 67 साल और उमा देवी 65 साल की हैं। 25 साल तक चले मुकदमे में दो आरोपियों ससुर महानंद और जेठ केशवनंद की मौत भी हो चुकी है।

मृत्युपूर्व बयान के विपरीत आया निर्णय
गंभीर रूप से जली अमिता ने उर्सला अस्पताल में 11 नवंबर को ही मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराए थे। बयान में उसने कहा था कि चाय बनाते समय सिल्क की साड़ी में आग लगने से वह जल गई है। इसके लिए कोई भी जिम्मेदार नहीं है। इसपर कोर्ट में अभियोजन ने तर्क रखा कि बयान दबाव में दिलाया गया था। 
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