कानपुर देहात। बिकरू कांड में इस्तेमाल की गई जेसीबी के मालिक ने रिलीज करने के लिए अदालत में प्रार्थनापत्र दिया था। बुधवार को एडीजीसी ने जेसीबी के कागजात आरटीओ से सत्यापन कराने का प्रार्थना पत्र दिया है। अदालत ने अब सुनवाई की अगली तारीख 10 फरवरी निर्धारित की गई है। बिकरू गांव में घटना वाली रात जेसीबी को रास्ते में खड़ाकर पुलिस टीम पर गोलियां बरसाईं गई थी।
सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रदीप पांडेय ने बताया कि मालिक ने विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित रामकिशोर की अदालत में जेसीबी को रिलीज करने का प्रार्थना पत्र दिया था। उनके अधिवक्ता ने तर्क दिया कि गांव की सड़क बनाने के लिए भीठी गांव के ग्राम प्रधान विष्णुपाल सिंह उर्फ जिलेदार सिंह ने जेसीबी को किराये पर लिया था। जिसे उसका चालक भी नहीं चला रहा था। घटना के बाद से जेसीबी को चौबेपुर थाने में खड़ा कराया गया है। जिससे वह खराब हो रही है। जेसीबी फाइनेंस की गई है। कमाई न होने से फाइनेंस की किस्त भी अदा नहीं हो पा रही हैं।
एडीजीसी ने बताया कि उन्होंने विरोध करते हुए तर्क दिया कि बिकरूकांड की शुरुआत ही जेसीबी के साथ हुई है। यदि जेसीबी पुलिस का रास्ता न रोकती तो दर्दनाक वारदात न होती। जेसीबी माल मुकदमाती है। जिससे विवेचना प्रभावित हो सकती है। उन्होंने जेसीबी के कागजातों का आरटीओ से सत्यापन कराने के बाद ही रिलीज प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की मांग की। जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। साथ ही मामले की सुनवाई के लिए 10 फरवरी तारीख मुकर्रर की है।
शस्त्र लाइसेंस मामले में अंजलि की अग्रिम जमानत खारिज
तथ्य छिपाकर शस्त्र लाइसेंस लेने के मामले में बिकरू कांड के आरोपी दीपक दुबे उर्फ दीपक की पत्नी अंजलि की अग्रिम जमानत एंटी डकैती कोर्ट ने खारिज कर दी है। सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रदीप पांडेय ने बताया कि बिकरूकांड में आरोपी विकास दुबे के भाई दीपक दुबे उर्फ दीपक की पत्नी अंजलि को गलत सूचना देकर शस्त्र लाइसेंस लेने का आरोपी बनाया गया है। अंजलि ने एंटी डकैती कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। सुनवाई के दौरान अंजलि के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि शासन की तीन सदस्यीय एसआईटी ने जांच मेें पाया था कि कुछ शस्त्र लाइसेंस कूटरचित अभिलेखों के आधार पर लिए गए हैं। एडीसी ने बताया कि उन्होंने अंजलि के विकास दुबे के परिवार का होने व एसआईटी की जांच में गलत सूचना देते हुए शस्त्र लाइसेंस बनाए जाने का तर्क रखते हुए अग्रिम जमानत न देने की मांग की। अदालत ने अपराध गंभीर प्रकृति का होने के चलते अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।