पत्नी की हत्या के मामले में सात साल से जेल में बंद पति को साक्ष्यों के अभाव में अपर जिला सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) निजेंद्र कुमार ने बाइज्जत बरी कर दिया है। वहीं, मामले में झूठी गवाही देने वाले सगे भाई के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज करा दिया है।
बिल्हौर क्षेत्र के गांव दादरपुर कराहा निवासी मनोहर लाल की पत्नी की 21 जुलाई 2015 को मौत हो गई थी। इस मामले में मनोहर के सगे भाई सजीवन लाल ने उसके खिलाफ गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि पिटाई के दौरान सिर में डंडा लगने से भाभी की मौत हो गई है।
पुलिस ने विवेचना करके आरोप पत्र दाखिल किया था। मामले की सुनवाई अपर जिला सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) निजेंद्र कुमार की अदालत में चल रही थी। सुनवाई के दौरान घटना के वादी सजीवन ने कई बार विरोधाभासी बयान देकर कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की।
हद तो तब हो गई जब उसने अपनी ही तहरीर को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जबकि उसमें लगे अंगूठे के निशान को अपना बताया। ये सुन कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। साथ ही जिला कारागार में निरुद्ध मनोहर को बाइज्जत बरी करते हुए तत्काल रिहा करने के आदेश दिए। सहायक शासकीय अधिवक्ता शशिभूषण सिंह चौहान ने बताया कि वादी की इस हरकत को कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए झूठी गवाही देने का प्रकीर्ण वाद दर्ज करा दिया है।