4 फरवरी 1974 को पहली बार दर्शकों के लिए खोले गए कानपुर चिड़ियाघर ने गुरुवार को अपना स्थापना दिवस मनाया। 42 साल पहले दर्शकों को जू में घूमने का किराया 50 पैसे और छह से 12 साल तक के बच्चों के लिए 25 पैसे रखा गया था।
अब बड़ों को 30 रुपये और 14 साल तक के बच्चों का 15 रुपये घूमने का किराया है। दो सौ जानवरों के साथ खुले इस जू में अभी 112 प्रजाति के 1300 जानवर हैं।
कभी चिड़ियाघर में 400 चीतल होते थे लेकिन छोटे-छोटे पौधे चर जाने की वजह से उन्हें जंगलों में वापस भेज दिया गया। उस समय के उद्योगपति बर्नी एलन ने 1913 से 1918 के बीच 76.56 हेक्टेयर में इसे बतौर जंगल विकसित किया था।
पहले जू निदेशक आरएस भदौरिया थे। जू की शुरुआत में यहां जानवरों के 10 बाड़े थे, जो अब 78 हो चुके हैं। हर बाड़े में एक सीसीटीवी कैमरा लगा है। कभी चारों तरफ से खुला रहा जू अब बाउंड्रीवाल से सुरक्षित है। घायल जानवरों को अस्पताल में नए बने इंपेशेंट वार्ड में भर्ती किया जाता है।
याद आता छज्जू
29 साल तक जू में रहे चिंपैंजी छज्जू की मौत के बाद दर्शक उसे बहुत याद करते हैं। हालांकि जू का सबसे पुराना सदस्य 36 साल का वनमानुष मंगल अभी चिड़ियाघर की शोभा बढ़ा रहा है।
झील में 60 पक्षी छोड़े
स्थापना दिवस पर जू की झील में 15 प्रजातियों की 60 चिड़ियों को छोड़ा गया। इसमें पेलिकन्स, पेटेंड स्टॉर्क, बतख, सारस क्रेन्स, डोमेसाइल क्रेेन्स आदि रहे। जू में बच्चों के लिए ‘वाल मैगजीन’ (एक तरह का बोर्ड) का उद्घाटन किया गया। इसमें बच्चों की पेंटिंग, कविताएं, लेख और फोटो लगाई गईं। जू निदेशक दीपक कुमार ने बच्चों के साथ केक काटकर स्थापना दिवस मनाया।