तेजस को तो लॉकडाउन के बाद ट्रेनों के बहाल होने के बाद दो बार शुरू करके बंद कर दिया गया, लेकिन काशी-महाकाल नहीं चल सकी। यह ट्रेन तीन दिन प्रयागराज तो तीन दिन लखनऊ होकर काशी से इंदौर वाया कानपुर और उज्जैन चलती थी। इसमें ज्यादातर यात्री उज्जैन के महाकालेश्वर तीर्थ में दर्शन करने वाले होते थे।
अब है उज्जैन की ट्रेनों का बुरा हाल
कानपुर होकर चलने वाली साबरमती एक्सप्रेस उज्जैन होकर चलती है, लेकिन एक महीने तक इस ट्रेन में सीटें नहीं हैं। इसके अलावा डिब्रूगढ़-अहमदाबाद, पटना-इंदौर, ओखा फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें चलती हैं, लेकिन इनमें भी जगह नहीं है। बसें मध्यप्रदेश न जा रही हैं और न ही वहां की बसें आ रही हैं। लिहाजा, यह विकल्प भी बंद है। निजी कार से जाने वाले लोग जा रहे हैं, लेकिन तमाम आम लोग ट्रेनों पर ही निर्भर हैं।
काशी-महाकाल एक्सप्रेस से आरामदायक यात्रा करने और दो तीर्थ स्थल को जोड़ने की वजह से पसंदीदा ट्रेन थी। लॉकडाउन के बाद पिछले साल से बंद है। इस मामले पर आईआरसीटीसी के उच्च अधिकारियों और रेलवे बोर्ड के अधिकारियों को ही फैसला लेना है। लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस भी अभी बंद चल रही है।
अनिल गुप्ता, मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक, आईआरसीटीसी