कानपुर- लॉकडाउन में खेल नहीं पा रहे बच्चों के मिजाज में बदलाव आने लगा है। ऑनलाइन कक्षाएं जरूर चलने लगी हैं लेकिन अब होमवर्क भी जल्दी हो जाता है। मम्मी के साथ पापा भी होमवर्क करवाने में मदद कर रहे हैं। पढ़ाई के अलावा और कोई काम न होने से बच्चे शैतानी अधिक कर रहे हैं या फिर चुप रहते हैं।
खाना-पीना कम कर दिया है। वे मोबाइल गेम और कार्टून चैनल देखने में व्यस्त हो जाते हैं। अगर कोई टोकता है तो बहुत चिल्लाकर बात करने लगते हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग की हेल्पलाइन देख रहे विशेषज्ञ डॉ. गणेश शंकर का कहना है कि माता-पिता फोन करके बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलाव के संबंध में बता रहे हैं।
बच्चे हाइपर हो जा रहे हैं। कहना नहीं मानते हैं। चिड़चिड़ापन आ रहा है। मोबाइल और कार्टून चैनल अधिक देखने लगे हैं। सुबह से लेकर रात तक इसी में जुटे रहते हैं। टोकने पर चिल्लाकर बात करते हैं। इसके लिए बच्चों के अटेंशन डायवर्ट तकनीक का इस्तेमाल किया जाना जरूरी है।
वहीं मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक सिंह चौहान ने बताया कि बच्चों में एनर्जी बहुत होती है। यह चैनलाइज नहीं हो पा रही है, जिसका असर उनके बदले हुए व्यवहार के रूप में देखने को मिल रहा है। अभिभावक बच्चों में चिड़चिड़ापन बढ़ने, खाना कम खाने, नींद में दिक्कत, हाइपर होने की शिकायतें कर रहे हैं। ऐसे में बच्चों का ध्यान सकारात्मक कार्यों की तरफ मोड़ना जरूरी है।