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कोरोना : लेवल थ्री में संसाधनों की बाधा, इसलिए कानपुर में मौतें ज्यादा

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कानपुर। प्रदेश में कोरोना से सबसे अधिक मौतें कानपुर में हुई हैं। राजधानी लखनऊ में यहां से तकरीबन डेढ़ गुना ज्यादा संक्रमित मिलने के बाद भी सात अगस्त तक वहां 138 मौतें कोरोना से हुईं। जबकि, कानपुर में यह आंकड़ा 256 पहुंच चुका है। यहां एक से 10 अगस्त के बीच ही 56 लोगों को कोरोना ने लील लिया। यहां ज्यादा मौतों की वजह की पड़ताल में सामने आया है कि रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आने के रोगी घंटों एंबुलेंस के इंतजार में ही बैठे रह गए। रोगी लेवल थ्री न्यूरो साइंसेज कोविड अस्पताल में जब पहुंचे, तब आक्सीजन सैचुरेशन प्रतिशत न्यूनतम 95 के स्थान पर 50-60 प्रतिशत रहा। इससे उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। यही नहीं, लेवल थ्री अस्पतालों में जरूरत के मुताबिक चिकित्सक और पैरा मेडिकल स्टाफ और अन्य संसाधन भी पर्याप्त नहीं हैं।
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हैलट में लेवल थ्री रोगियों के लिए 200 बेड की व्यवस्था की बात की गई, लेकिन यहां पर उतना स्टाफ ही नहीं है। खासतौर पर पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी के कारण सात की जगह एक स्टाफ नर्स की ड्यूटी लग रही है। अस्पताल की व्यवस्था के अलावा रियल टाइम भर्ती न होना रोगियों पर सबसे अधिक भारी पड़ा। स्वास्थ्य विभाग शासन के उन निर्देशों का भी पालन नहीं कर पाया, जिनमें कहा गया था कि डायबिटीज, हाइपरटेंशन, गुर्दा, लिवर और कैंसर के रोगियों को पहले चिह्नित कर लिया जाए। मरने वालों में सबसे अधिक यही रोगी हैं।
कोरोना से अब तक हुई मौतों में 12 को छोड़कर बाकी सभी रोगियों में किसी न किसी रोग की हिस्ट्री रही। अधिकतर रोगी डायबिटीज, हाइपरटेंशन की चपेट में रहे। साथ ही दमा, अस्थमा, गुर्दा रोग, थायरॉयड के रोगियों की मौत हुई। कोरोना संक्रमण इन पर भारी पड़ गया। जब अस्पताल पहुंचे तो उन्हें स्थिति के अनुसार दवा देने के अलावा चिकित्सकों के पास और कोई रास्ता नहीं था। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल का कहना है कि रोगी समय से अस्पताल पहुंच जाएं तो सही ढंग से इलाज हो और ठीक भी हो सकते हैं। लेकिन, अति गंभीर स्थिति में पहुंच रहे हैं।
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लेवल थ्री की निजी क्षेत्र में पर्याप्त व्यवस्था नहीं : लेवल थ्री की निजी क्षेत्र के अस्पतालों में भी व्यवस्था नहीं हो पाई। सरकारी क्षेत्र में हैलट के अलावा मंडल के सैफई, एयरफोर्स स्टेशन अस्पताल समेत एकाध ही हैं, जहां लेवल थ्री के रोगियों को भर्ती किया जा सकता है। लेकिन, बेड गिनती के हैं। निजी क्षेत्र में रीजेंसी की गोविंदनगर शाखा में पांच बेड वेंटिलेटर युक्त हैं। इससे सारा लोड हैलट पर पड़ गया, जिससे व्यवस्था चरमरा गई। वहीं, हैलट के कोविड अस्पताल में महज 20 वेंटिलेटर हैं। इस संख्या से ज्यादा गंभीर स्थिति वाले मरीजों को होल्डिंग एरिया में रखा जाता है। ऐसी स्थिति में भी मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है।
कांटैक्ट ट्रैसिंग न होने से भी बिगड़ी व्यवस्था : स्वास्थ्य विभाग की सर्विलांस टीम भी ढंग से कॉंटैक्ट ट्रैसिंग नहीं कर पाई। इससे समय रहते रोगियों का पता नहीं चल सका। नतीजा रोगी देर में पहुंचे, तब तक हालत बिगड़ चुकी थी। कॉटैक्ट ट्रैसिग न होने से संक्रमण का फैलाव बढ़ता चला गया।
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