जिले में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति शृंखला प्रभावित न हो इसके लिए ढाई हजार औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन की अनुमति तो दे दी गई, लेकिन तमाम फैक्टरियों में कच्चे माल का संकट खड़ा हो गया है। कई इकाइयों में दो दिन उत्पादन होने के बाद मशीनें थम गईं। अब ये उद्यमी इधर-उधर से कच्चा माल हासिल करने के जुगाड़ में लगे हैं। स्थिति यह है कि जितना माल मिल रहा है, उतनी देर मशीनें चल जा रही हैं। इसके बाद फिर कच्चे माल की राह देखनी पड़ रही है।
लॉकडाउन में औद्योगिक इकाइयों के लिए उत्पादन इतना आसान भी नहीं है। फैक्टरियों में पहले से रुके श्रमिकों की बदौलत उत्पादन तो शुरू करा दिया गया, लेकिन कच्चा माल न होने से उत्पादन को गति नहीं मिल पा रही। इस संकट से तमाम औद्योगिक इकाइयां जूझ रही हैं।
साबुन बनाने वाले कारोबारी बताते हैं कि इसमें इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल पाम फैटी और राइस फैटी का आयात मलयेशिया और इंडोनेशिया से होता है। इन दोनों देशों से पिछले तीन महीने से आयात पूरी तरीके से रुका हुआ है। दिल्ली के कुछ बड़े कारोबारियों के पास यह कच्चा माल है, लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से दिल्ली को रेड जोन में शामिल किया गया है। इस कारण यहां से भी वाहनों का आवागमन नहीं हो पा रहा है। इसी तरह दवाइयां बनाने में भी दिल्ली और मुंबई से तमाम तरह का कच्चा माल आता है। इनकी भी खेप कानपुर तक नहीं पहुंच पा रही है।