जनवरी में कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना है पर स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां अधूरी हैं। कोरोना की दो लहरें झेलने के बावजूद कानपुर के अस्पतालों में रोगियों के इलाज में संपूर्ण व्यवस्था नहीं हो पाई है। स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग पूरे साल कोरोना से निपटने की तैयारी करता रहा है। इसके बाद भी नतीजा ढाक के तीन पात है। हैलट के सभी वार्डों में अभी ऑक्सीजन पाइप लाइन नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में रोगियों को ऑक्सीजन सिलिंडर से काम चलाना पड़ेगा। वेंटिलेटर तो आ गए हैं लेकिन इन्हें संचालित करने वाला स्टाफ नहीं है। एनआरएचएम से दूसरी लहर में जो आउटसोर्सिंग स्टाफ मिला था, उसे भी हटा दिया गया है।
उर्सला में भी जांच की क्षमता कम है। दूसरी लहर में एनआरएचएम की ओर से दिए गए डेढ़ सौ आउटसोर्सिंग स्टाफ को हटा दिया गया है। वहीं, मेडिकल कॉलेज के पास जूनियर डॉक्टर-1 का पूरा बैच नहीं है। दो महीने में जेआर-2 का कोर्स पूरा हो जाएगा। कोरोना की पहली और दूसरी लहर के अलावा इमरजेंसी, ओटी और वार्डों की जिम्मेदारी जेआर-1 पर ही रहती है। अगर इस बीच लहर आ गई तो स्थिति संभालनी मुश्किल पड़ जाएगी। सीनियर रेजीडेंट की संख्या बहुत कम है। वहीं, दो सीएचसी में ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट लगने थे जो नहीं लग पाए। सीएचसी पर बालरोग विशेषज्ञ तैनात नहीं हो पाए हैं।
कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर शासन से स्टाफ मांगा गया है। सामान्य स्टाफ के साथ ही टेक्निकल स्टाफ की भी जरूरत है। कोविड लैब में भी स्टाफ की कमी है। स्टाफ मिलेगा, उसके बाद ही दूसरे जिलों के सैंपल की जांच हो पाएगी। वार्डों में ऑक्सीजन लाइन बिछाई जा रही है। -डॉ. संजय काला, प्राचार्य, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज
सारी तैयारी की जा रही है। सीएचसी पर ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट का काम भी पूरा हो जाएगा। शासन की गाइडलाइन के अनुरूप तैयारी की गई है। तीसरी लहर को ध्यान में रखकर पूरी सतर्कता बरती जा रही है। -डॉ. नैपाल सिंह, सीएमओ