कानपुर बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे, उसके खजांची जय वाजपेई व गिरोह से जुड़े सदस्यों, सात आईपीएस व आठ पीपीएस अफसरों तथा 16 थानेदार-दरोगाओं की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट खुफिया विभाग ने तैयार कर ली है। संसद के मानसून सत्र से पहले रिपोर्ट सौंपी जा सकती है। अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने दिल्ली में आईबी ऑफिस में दोबारा बयान दर्ज कराए हैं। सीबीआई कार्यालय में भी शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में सौरभ ने कहा कि बिकरू कांड के एक साल बीतने के बाद भी ईडी और आयकर विभाग ने बिकरू कांड के आरोपियों तथा जय वाजपेई और उसके गिरोह पर कोई कार्रवाई नहीं की। गैंगस्टर एक्ट के तहत विकास दुबे और उसके गिरोह के सदस्यों की कोई संपत्ति जब्त नहीं की गई। जय वाजपेई और उसके भाइयों की सभी संपत्तियां जब्त करने के बजाय सिर्फ जर्जर मकानों को जब्त कर बाकी संपत्तियों को बचा दिया गया।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
जय के भाइयों को न तो जिला बदर किया गया, न ही गुंडा एक्ट लगाया गया और न ही इनके गैंग को रजिस्टर्ड ही किया गया। एसआईटी रिपोर्ट में की गई संस्तुतियों के आधार पर कार्रवाई करने के बजाय लीपापोती कर दी गई। सौरभ ने विकास और उसके गिरोह के सदस्यों के शस्त्र लाइसेंस जिन जनप्रतिनिधियों की सिफारिश पर बने उनकी, वर्ष 2008 से 2020 तक कानपुर में तैनात रहे डीएम, एसएसपी व एलआईयू अफसरों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की।
विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
साथ ही कहा कि बिकरू कांड के आरोपियों को अलग-अलग जेल में रखा जाय जिससे वह मुकदमे व गवाहों को प्रभावित न कर सकें। उन्होंने बिकरू कांड में घायल हुए पुलिसकर्मियों को भी 50-50 लाख रुपये मुआवजा देने, मामले की ईमानदारी से जांच करने के लिए एसआईटी जांच में शामिल अफसरों को प्रशस्ति पत्र देने की भी मांग की।
विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
ईडी को सौंपी 712 रजिस्ट्रियां
सौरभ ने बताया कि विकास दुबे गैंग को संरक्षण देने वाले पुलिस अफसरों व कर्मचारियों की संपत्तियों की जांच दिल्ली स्थित प्रवर्तन निदेशालय कर रहा है। उन्होंने गिरोह से जुड़े लोगों की 712 संपत्तियों की रजिस्ट्रियां निदेशालय में सौंपी हैं। पुलिस विभाग में ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर जय और कुछ सफेदपोश अवैध उगाही करते हैं और जरायम से कमाई रकम से संपत्तियों की खरीद-फरोख्त करते हैं।
विकास दुबे कांड: जय बाजपेई और पत्नी श्वेता
- फोटो : amar ujala
कोई बवाल होने पर इन्हीं पुलिस अफसरों का सहयोग भी लेते हैं। उन्होंने मामले की गहनता से जांच की मांग की है। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक को प्रार्थना पत्र देकर जय वाजपेई, उसकी पत्नी व भाइयों तथा उन्हें संरक्षण देने वाले पुलिसकर्मियों की जांच विजिलेंस के निदेशक की निगरानी में लखनऊ इकाई से कराने तथा इनके गिरोह की संपत्तियों की जांच आर्थिक अपराध शाखा से कराने की मांग भी की है।