कौमी एकता को मजबूत कर रहे हैं दोनों
इसमें दोनों मुस्लिम युवकों को पाठ पढ़ते देख कर लोग अचंभित थे। आज के इस दौर में दोनों मुस्लिम युवक कौमी एकता के साथ भाईचारे को मजबूत कर रहे हैं। ढोलक-मजीरा के बीच भक्ति में डूबे माहौल में मुस्लिम समाज के दोनों लोगों को सुंदरकांड का पाठ करता देख लोग उनकी सराहना कर रहे हैं।
16 वर्षों से कर रहे हैं सुंदरकांड का पाठ
सुंदरकांड का पाठ करने वाले मो. जहीर बताते है कि वह वर्षों से सुंदरकांड का पाठ कर रहे है। हम सब ईश्वर की संतानें हैं। जिनको राजनैतिक रोटियां सेंकना है, वो हिंदू-मुस्लिम में भेद डाल रहे हैं। सुलेमान ने बताया कि वह पिछले 16 वर्षों से सुंदरकांड का पाठ कर रहे हैं। गांव में हिंदू-मुस्लिम में कोई भेदभाव नहीं है।
पिता की मौत पर चालीसवां व तेरहवीं दोनों हुईं
सुंदरकांड का पाठ करने वाले सुलेमान ने बताया कि उसके पिता बसीर रामलीला के मंचन के दौरान बाणासुर का अभिनय करते थे। पिता का निधन हो चुका है। उनके पिता ने अपने पुत्रों से कहा था कि उनकी मौत के बाद मुस्लिम रीति-रिवाज से उनका संस्कार भी करना। पिता के निधन पर परिजनों ने चालीवां व तेरहवीं संस्कार दोनों किया था।