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कंप्यूटर पर लगातार काम से आफत में आती है रीढ़, आरामतलबी की लाइफ स्टाइल बढ़ा रही स्पाइन की दिक्कतें

Mon, 10 Jun 2019 03:03 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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लाइफ स्टाइल बढ़ा रही स्पाइन की दिक्कतें
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कंप्यूटर पर घंटों लगातार बैठकर काम करते रहने, आरामतलबी की लाइफ स्टाइल, व्यायाम न करने का नतीजा है कि रीढ़ के रोग बढ़ गए हैं। युवावस्था की यह आरामतलबी थोड़ी सी उम्र बढ़ने के बाद रीढ़ के रोग देती है जिससे व्यक्ति बिस्तर पकड़ लेता है।
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युवावस्था में व्यायाम न करने से रीढ़ के बगल की मांसपेशियां ढीली और कमजोर हो जाती हैं। रविवार को यह बात कानपुर स्पाइन सिम्पोजियम में बताई गईं। इसके साथ ही रीढ़ के इलाज की नई विधियां, तकनीक के संबंध में स्पाइन रोग विशेषज्ञों ने गहन मंथन किया। 
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हर अस्थि रोग विशेषज्ञ स्पाइन के रोग का सटीक उपचार नहीं कर पाता

सांकेतिक तस्वीर
कानपुर आर्थोपेडिक एसोसिएशन और रीजेंसी अस्पताल के बैनर तले द्वितीय कानपुर स्पाइन सिम्पोजियम-2019 का आयोजन स्वरूप नगर स्थित एक होटल में किया गया। इसमें प्रदेश भर से सौ अस्थि रोग विशेषज्ञों ने शिरकत की।

कार्यक्रम संयोजक सीनियर स्पाइन सर्जन डॉ. हरप्रीत सिंह ने बताया कि सिम्पोजियम में रीढ़ के विभिन्न रोगों, इलाज और तकनीक के संबंध में चर्चा हुई। गड़बड़ लाइफ स्टाइल की वजह से लोगों को कमर दर्द, स्लिप डिस्क, सियाटिका, मांस का बढ़ जाने समेत विभिन्न प्रकार की दिक्कतें हो रही हैं।

सिम्पोजियम में कहा कि हर अस्थि रोग विशेषज्ञ स्पाइन के रोग का सटीक उपचार नहीं कर पाता। इससे स्पाइन विशेषज्ञ से ही मशविरा लेना चाहिए। कार्यक्रम में मेडिकल कालेज की प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी, रीजेंसी के एमडी डॉ. अतुल कपूर, आर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. पीएम गद्रे, एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र नाथ, डॉ. रवि गर्ग आदि मौजूद रहे। 
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