आईआईटी कानपुर की एक रिसर्च में पाया गया है कि बारिश और कटान से उपजाऊ मिट्टी बेहद तेजी से गंगा में समा रही है। धारा की राह में टीले बन गए हैं, जो गंगा की अविरल-निर्मल धारा को प्रभावित कर रहे हैं। गंगा के आसपास के क्षेत्रों में फसलों की पैदावार घट रही है। अब जरूरत उपजाऊ मिट्टी की कटान रोकने की है तभी फसलों की पैदावार बढ़ सकेगी।
डीएवी पीजी के केमिस्ट्री डिपार्टमेंट में शुक्रवार को गंगा प्रदूषण, एनालिसिस एंड रेमिडीज विषय पर दो दिवसीय (सात-आठ अक्तूबर) कार्यशाला का आयोजन हुआ। इसका उद्घाटन माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री विजय बहादुर पाल ने किया। राज्यमंत्री ने कहा कि सबसे पहले गंगा की सहायक नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाया जाए, फिर गंगा से प्रदूषण दूर करने का अभियान छेड़ा जाना चाहिए।
आईआईटी के प्रो. डीपी मिश्रा ने कहा कि टेनरी और औद्योगिक इकाइयों का वेस्ट नालों के माध्यम से सीधे गंगा में जाता है। इसे रोकना होगा। गंगा पर बांध बनाने से बाज आना होगा। इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्र चौधरी, प्रिंसिपल डॉ. एलएन वर्मा, संयोजक डॉ. डीपी राव, डॉ. अशोक श्रीवास्तव, डॉ. अनिल अवस्थी और डॉ. अल्का श्रीवास्तव ने कहा कि जागरूकता अभियान चलाकर गंगा प्रदूषण कम किया जा सकता है।
डीएमएसआरडीई के निदेशक डॉ. एन. ईश्वरा प्रसाद ने कहा कि राजस्थान और पंजाब में भारी धातु (हैवी मेटल्स) युक्त पानी आता है। इसका सेवन सैन्य अधिकारियों और जवानों के लिए खतरनाक है। इसकी गंभीरता को देखते हुए ही डीएमएसआरडीई ने पानी को भारी धातु मुक्त बनाने की कवायद शुरू की। कुछ क्षेत्रों में धातु मुक्त पानी की सप्लाई की जा रही है।