कानपुर में कोमॉर्बिड रोगियों पर शीतलहर का कहर जारी है। सबसे बुरा असर ब्लड प्रेशर के रोगियों पर पड़ रहा है। बीपी में उतार-चढ़ाव अधिक है। इसके साथ ही नसों के सिकुड़ने से रक्त प्रवाहित होने से खून का थक्का जम जा रहा है। इससे रोगियों को हार्ट अटैक और ब्रेन अटैक पड़ रहा है।
गुर्दे की नसों में थक्का जमने से फेल हो जा रहे हैं। बुधवार को तीन और रोगियों की मौत हो गई। इनमें एक की ब्रेन अटैक और दो की मौत हार्ट अटैक से हुई है। इसके साथ ही कार्डियोलॉजी और हैलट इमरजेंसी में गंभीर रोगियों को भर्ती किया गया है। हैलट और उर्सला की ओपीडी में बुधवार को फ्लू रोगियों की भरमार रही।
हैलट इमरजेंसी में दोपहर एक बजे तक 51 रोगी गंभीर हालत में भर्ती हुए थे। इसके साथ ही कार्डियोलॉजी की इमरजेंसी में रोगी एंजाइना और सांस फूलने की शिकायत लेकर आए। काकादेव के निजी अस्पताल में इलाज करा रहे ब्रेन अटैक के रोगी कृष्णकांत (65) की मौत हो गई।
पिछले साल उन्हें ब्रेन अटैक पड़ा था लेकिन स्थिति संभल गई। मंगलवार देर रात फिर तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। इसी तरह फजलगंज के रजनीश (62) की हार्ट अटैक से मौत हुई। उनकी एक साल पहले बाईपास सर्जरी हुई थी। चकेरी के रहने वाले गोपाल (56) की ब्रेन अटैक से मौत हुई है। वे हाई ब्लड प्रेशर के रोगी रहे हैं। परिजनों ने बताया कि मंगलवार रात उन्हें बेहोशी आ गई।
सुबह उर्सला लाए, यहां से हैलट रेफर कर दिया गया। एंबुलेंस में ही उनकी मौत हो गई। ठंड बढ़ने से ब्रेन अटैक के रोगियों में इजाफा हुआ है। न्यूरोलॉजी विभाग में ब्रेन अटैक के 20 रोगी भर्ती हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक वर्मा का कहना है कि लोग ब्लडप्रेशर का ध्यान नहीं रख रहे हैं। लापरवाही से मस्तिष्क में ब्लीडिंग हो जाती है। रोगी समय से दवाएं लें और ठंड से बचाव करें।