कानपुर। जिलाधिकारी, वित्त एवं लेखाधिकारी और शहर के दो विधायकों की ओर से सीएमओ पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की शासन स्तर से विजिलेंस जांच शुरू हो गई है। इससे सीएमओ के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। साथ ही कथित रूप से सीएमओ के वायरल ऑडियो की फॉरेंसिक जांच कराने की तैयारी भी चल रही है।
कथित रूप से सीएमओ हरिदत्त नेमी के 13 जून को जिलाधिकारी पर अभद्र टिप्पणी के सोशल मीडिया पर कई ऑडियो वायरल हुए थे। इस पर भाजपा नेता दो फाड़ हो गए थे और उनहोंने डॉ. नेमी के पक्ष और विपक्ष में कई पत्र लिखे थे। इसके बाद कथित रूप से सीएमओ का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने जेएम फार्मा कंपनी को 30 लाख रुपये के भुगतान को लेकर एसीएमओ और वित्त एवं लेखाधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए थे। वायरल ऑडियो में ऊपर तक पैसे पहुंचाने की कही गई वात और नियम विरुद्ध तरीके से भुगतान करने के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए शासन स्तर से विजिलेंस जांच शुरू कर दी। इसके साथ ही उनका निलंबन कर दिया गया। अब सीएमओ के कार्यकाल के दौरान किए गए भुगतान और अन्य फैसलों की जांच होगी।
यह विवाद 5 फरवरी, 2025 से शुरू हुआ, जब कानपुर डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने सीएमओ ऑफिस पर छापा मारा था। इस दौरान सीएमओ डॉ. हरी दत्त नेमी समेत 34 अधिकारी-कर्मचारी गैरहाजिर मिले थे। डीएम ने सीएमओ कार्यालय से ही एक वीडियो जारी किया। कहा, रजिस्टर में नाम लिखे हैं, लेकिन 34 अधिकारी-कर्मचारी ऑफिस में नहीं मिले। इस पर सभी का एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिए थे। इसके बाद डीएम तहसील दिवस के दौरान आसपास की सीएचसी और पीएचसी पहुंचकर जांच कर रहे थे। फरवरी में वित्त एवं लेखाधिकारी वंदना सिंह के सारे अधिकारी छीनकर नियमों का उल्लंघन कर वित्तीय भुगतान और मनमाने तरीके से फर्मों का चयन कर सामग्री की खरीदारी की शिकायत जिलाधिकारी से की गई थी। दरअसल, एनआरएचएम घोटाले की जांच के बाद वर्ष 2014 में वरिष्ठ एवं वित्त लेखाधिकारी की सभी जिलों में तैनाती करने के निर्देश दिए गए थे। इस पद पर जिले में डॉ. वंदना सिंह तैनात की गई थीं। फरवरी माह में सीएमओ ने डॉ. वंदना से वित्तीय भुगतान के अधिकार छीनकर डॉ. नमित रस्तोगी को दे दिए। नियम विपरीत कार्रवाई की डॉ. वंदना ने शासन तक शिकायत की थी।
जिलाधिकारी ने सीएमओ की मनमानी देखने के बाद 15 अप्रैल, 2025 को प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को पत्र लिखा था। इसमें सीएमओ की सभी खामियों को बताकर उन्हें जिले से हटाने के लिए कहा था। इसके बाद भी शासन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद 5 जून को फिर सीएमओ को हटाने के लिए शासन को पत्र लिखा। वहीं 12 जून को कथित रूप से सीएमओ के कई ऑडियो डीएम पर अभद्र टिप्पणी करते हुए वायरल हुए, जिसके बाद मामला पूरी तरह से चर्चा में आ गया।