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Kanpur News: विनीत मिनोचा के दवा कारोबार पर भी संकट के बादल

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कानपुर। दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या और उनके बेटे सुब्रत के जेल जाने के बाद अब कारोबार पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। बिरहाना रोड स्थित विनीत की फर्म में भले ही उनकी पत्नी और बेटी बैठ रहीं हो लेकिन कामकाज की जिम्मेदारी कर्मचारी ही उठा रहे हैं। ऐसे में कयास तेज हो गए हैं कि कभी भी कारोबार समेटा जा सकता है। सूत्रों के अनुसार विनीत मिनोचा की ओर से जारी किए गए कंपनी के चेक भी बाउंस हो रहे हैं। इसकी वजह यह है कि विनीत की हत्या के बाद ही उनके बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए गए थे।
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पांच सितंबर की रात विनीत की उनके इंद्रानगर स्थित अपार्टमेंट में चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने पहले हत्या की साजिश रचने के आरोप में उनकी बहू शालू को जेल भेजा था। बाद में वारदात को अंजाम देने वाले विशाल ने जब हत्या कराने के लिए बेटे सुब्रत का नाम लिया तो कहानी पलट गई। पुलिस ने शालू को रिहा कराकर उसके पति सुब्रत को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। करीब एक सप्ताह पूर्व जब सुब्रत को पुलिस ने गिरफ्तार किया तब से मिनोचा परिवार का 50 करोड़ का दवा कारोबार भी लड़खड़ाने लगा है।
सूत्रों के अनुसार अलग-अलग कंपनियों को दिए गए तकरीबन 10 से 15 लाख रुपये के चेक बाउंस हो गए हैं। इससे दवाओं का नया स्टाॅक भी नहीं आ पा रहा है। माना जा रहा है कि विनीत की पत्नी पुनीता और बेटी शुभांगी अभी कारोबार में परिपक्व नहीं हैं। इस कारण कभी भी फर्म के चैनल पर ताला पड़ सकता है। हालांकि, बाजार के व्यापारियों का कहना है कि परिवार कारोबार से संबंधित जो मदद मांगेगा वो की जाएगी।
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मन की शांति के लिए शालू गई छतरपुर आश्रम
पांच सितंबर से लेकर 30 सितंबर के बीच 25 दिन शालू की जिंदगी में 50 सालों की तरह गुजरे हैं। उसने कभी सोचा भी न होगा इन 25 दिनों में उसका परिवार ऐसा बिखरेगा कि शायद ही कभी जुड़े पाए। यह शब्द हैं शालू के भाई धीरज अरोड़ा के। उन्होंने बताया कि शालू अपने मन की शांति के लिए बुधवार को अपनी बहन सोनिया के साथ छतरपुर स्थित गुरुजी के आश्रम गई है।

जेल में करवटें बदलता रहता सुब्रत
वह सुब्रत जो कभी एक घंटे भी बिना एसी के घर या फर्म में न रहा हो उसे अब अपनी रातें जेल में बितानी पड़ रही हैं। जेल सूत्रों के अनुसार सुब्रत बैरक में रात भर करवट बदलता रहता है। दिन में किसी दीवार से टेक लगाकर आंखें बंदकर बैठा रहता है। खाना-पीना भी न के बराबर है। कुछ बंदियों से बातचीत में सिर्फ इतना ही कहता है कि पिता ने जैसा किया वैसा भरा है। कभी-कभी वह यह जरूर कहता है कि शालू के जेल जाने से वह ज्यादा दुखी और परेशान हो गया था। इसकी वजह से ही वह नींद की गोलियां खाने लगा था।
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