किराना सेवा समिति के कार्यालय में हुई बैठक में बंदी पर विचार विमर्श करते व्यापारी।
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कानपुर। सराफा कारोबारियों के आंदोलन के समर्थन में उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष श्याम बिहारी मिश्रा की ओर से चार अप्रैल को बुलाई गई प्रदेशव्यापी बंदी पर भी फूट के बादल छा गए। गुरुवार को अखबारों में बंदी का समाचार पढ़ने के बाद व्यापार संगठनों में इस बात की खुसुरफुसुर होने लगी कि अन्य व्यापार मंडल से सहमति लिए बिना प्रदेश बंदी का आह्वान क्यों किया गया? दोपहर तक व्यापार संगठन पक्ष और विपक्ष में बंट गए। आखिरकार शाम 4ः30 बजे दि किराना मर्चेंट्स एसोसिएशन नयागंज के अध्यक्ष अवधेश वाजपेयी की अगुवाई में दर्जन भर से अधिक प्रमुख व्यापार संगठनों के पदाधिकारियों ने बैठक कर समर्थन देने या न देने पर चर्चा की।
कैनाल रोड स्थित किराना सेवा समिति के कार्यालय में हुई बैठक में कानपुर कपड़ा कमेटी, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, कानपुर उद्योग व्यापार मंडल (कंछल गुट), लोहा व्यापार मंडल, मिल्स एंड मशीनरी व्यापार मंडल, लाटूश रोड, एक्सप्रेस रोड व्यापार मंडल, टिंबर मर्चेंट्स एसोसिएशन के अलावा अन्य छोटे बड़े संगठन शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में इस बात का विरोध किया कि उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल ने बंदी की घोषणा से पहले उनसे सहमति तक नहीं ली। यह भी जानने की कोशिश नहीं की कि बंदी कर सकते हैं या नहीं। इसके अलावा जिन सराफा कारोबारियों के समर्थन में बंदी की जानी है, उनकी तरफ से भी कोई समर्थन नहीं मांगा गया। अवधेश वाजपेयी ने कहा कि सराफा कारोबारी समर्थन मांगेंगे तो उस पर विचार किया जाएगा। फिलहाल समर्थन देने या न देने के पक्ष में कोई फैसला नहीं लिया गया है। यह देखा जाएगा कि वित्तीय वर्ष की शुरुआत में बाजार बंदी करना संभव होगा या नहीं। ज्ञानेश मिश्रा ने कहा कि बिना सहमति लिए बंदी की घोषणा करना तुगलकी फरमान है। बैठक में कपड़ा कमेटी से हीरा भाई, मुन्ना बाबू, काशी शर्मा, श्रीकृष्ण गुप्ता, सुरेंद्र, प्रेमू शुक्ला, लोहा व्यापार से अतुल त्रिपाठी, विनय, विजय, मनोज अग्रवाल अरविंद गुप्ता, गुरजिंदर सिंह मौजूद रहे।