यूपी के कानपुर में शौचालय बनवाने की रकम की बंदरबांट का बड़ा मामला सामने आया है। केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत गांवों को खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) करने के लिए विकास खंड बिल्हौर ब्लॉक के गांव अकबरपुर सेंग, संजती बादशाहपुर और राधन में ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) और ग्राम प्रधान ने नियम विरुद्ध तरीके से लाभार्थियों की बजाय शौचालय निर्माण की धनराशि फर्मों के खातों में ट्रांसफर कर दी। निर्माण की गुणवत्ता भी खराब मिली है।
प्रभारी डीएम रहे अरुण कुमार ने ग्राम प्रधान शशिकांत (अकबरपुरसेंग), शिखा सिंह (संजती बादशाहपुर) और कंचन अग्निहोत्री (राधन) व जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) ने इनके वीडीओ संजय मिश्रा को नोटिस जारी किया है। जारी नोटिस में लिखा गया है कि धनराशि का गबन करने की नीयत से ऐसा किया गया। अकबरपुर सेंग गांव में 271 शौचालयों के निर्माण के लिए 32.52 लाख, संजती बादशाहपुर में 533 शौचालयों के लिए 63.96 लाख और राधन में 325 शौचालयों के लिए 39 लाख रुपये जारी किए गए थे। इनमें से अकबरपुरसेंग में 44, संजती बादशाहपुर में 119 और राधन में अभी 27 शौचालयों का निर्माण किया जाना बाकी है।
योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को खुद शौचालय निर्माण करवाने पर 12 हजार रुपये की धनराशि दी जानी है। कमीशन के खेल में वीडीओ-ग्राम प्रधान के साथ मिलकर शौचालयों का निर्माण करा दिया। निर्माण के बदले फर्मों के खाते में भुगतान कर दिया गया। अफसरों को जांच में शौचालय निर्माण की गुणवत्ता भी सही नहीं मिली है। जिन शौचालयों को पूरा दिखाया गया है, वह भी आधे-अधूरे हैं।
डीपीआरओ आरएस चौधरी ने बताया कि योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत और लाभार्थी दोनों ही शौचालय बनवा सकते हैं। सरकारी विभागों की ओर से बनवाए गए शौचालयों पर लोग बहुत अधिक गंभीरता नहीं दिखाते। इसलिए वीडीओ-ग्राम प्रधानों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए थे कि वह लाभार्थियों को ही शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित करें और पैसा सीधे उनके खातों में ही भेजें। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अनियमितताओं को देखते हुए सभी से एक सप्ताह में स्पष्टीकरण मांगा गया है। अन्य गांवों में भी शौचालय निर्माण की जांच जारी है।