- जमीयत उलेमा-ए-हिंद के दोनों गुटों और शहर के दोनों शहरकाजियों में ठनी
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कानपुर में देवबंदी विचारधारा के शहरकाजी मौलाना अब्दुल कुद्दूस हादी और कार्यवाहक शहरकाजी मौलाना मतीनुल हक ओसामा एक बार फिर आमने-सामने हैं। शहरकाजी पद पर मनोनयन को लेकर हुए मतभेद के बाद अब जलसे की तारीखों को लेकर विवाद है। इसमें भी जमीयत उलेमा-ए-हिंद की राष्ट्रीय स्तर के मतभेद उजागर हो गए हैं।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद (महमूद मदनी गुट) का राष्ट्रीय अधिवेशन 12 और 13 नवंबर को अजमेर में है। इसमें देश भर के उलेमा के अलावा बरेलवी, देवबंदी समेत सभी मसलकों के प्रतिनिधियों को बुलाया गया है। इस जमीयत के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना मतीनुल हक ओसामा कार्यवाहक शहरकाजी भी हैं। अब 13 नवंबर को ही जमीयत उलेमा-ए-हिंद (अरशद मदनी गुट) ने बाबूपुरवा के बगाही मैदान में तहफ्फुज-ए-दस्तूरे हिंद कांफ्रेंस कर ली। इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी को भी बुला लिया है। इसी बात को लेकर विवाद हो गया है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद (महमूद मदनी गुट) के प्रदेश अध्यक्ष और कार्यवाहक शहरकाजी मौलाना मतीनुल हक ओसामा ने कहा कि अजमेर में जमीयत के अधिवेशन में देश भर के सभी मसलकों के उलेमा और सज्जादानशीन शामिल हो रहे हैं। इसका उद्देश्य मुसलमानों को उनके सामाजिक मुद् दों पर एकजुट करना है। कानपुर से भी काफी लोग जा रहे हैं। अब उसी तारीख को कार्यक्रम करके यह मैसेज देना कि हम एक नहीं हैं। ऐसे लोगों को मिल्लत से ज्यादा अपना हित प्यारा होता है।
दूसरी तरफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद (अरशद मदनी गुट) के प्रदेश उपाध्यक्ष और शहरकाजी मौलाना अब्दुल कुद्दूस हादी का कहना है कि दो हजार किलोमीटर होने वाले किसी कार्यक्रम से कानपुर में होने वाले कार्यक्रम से क्या फर्क पड़ेगा। किसी की शादी हो तो उस दिन अब कोई शादी न करे। उनके जलसे को भी उद्देश्य देश में लोकतांत्रिक मूल्यों और अधिकारों की रक्षा है। मौजूदा माहौल पर चर्चा होगी। सभी मसलक के लोग इसमें शामिल होंगे। गलत बातें की जा रही हैं।