इसे सिस्टम की बेशर्मी कहें या लापरवाही। चित्रकूट जिले में नगर परिषद के थरपहाड़ गांव में आजादी के 78 साल बाद भी एक पक्की सड़क नसीब नहीं हुई। नतीजा- 28 साल का गोरे सिंह उल्टी-दस्त से तड़पता रहा और ग्रामीण उसे टाट में बांधकर कंधे पर लादने को मजबूर हुए।
ये कोई पहला मामला नहीं। यहां हर बीमार, हर गर्भवती महिला की यही कहानी है। एम्बुलेंस गांव में आ ही नहीं सकती। मरीज को झोली में डालो, कंधे पर टांगो, फिर भागो अस्पताल।और प्रशासन? सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ा रहा है। टेंडर हो गया, भोपाल से स्वीकृति आएगी, काम जल्द शुरू होगा...यही घिसा-पिटा जवाब।