कोरोना काल के बाद बच्चों के लिवर में बड़ों जैसी दिक्कत हो गई है। लिवर फैटी होने के साथ एंजाइम भी बढ़ा है। हैलट के मल्टी सुपर स्पेशियलिटी के गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभाग में औसत पांच रोगी हर ओपीडी में आ रहे हैं। बाल रोगियों की जो डायग्नोसिस तैयार की गई है, उनमें लिवर की खराबी आने के मुख्य तीन कारण मिले हैं।
इनमें बिगड़ी लाइफ स्टाइल, खानपान में गड़बड़ी और स्ट्रेस है। कोविड कॉल के लॉकडाउन के दौरान बच्चों में खेलने कूदने आदत खत्म हुई थी, वह अभी तक नहीं सुधर पाई है। इसके साथ ही वे जंक फूड ज्यादा खा रहे हैं। इसका सारा जोर लिवर पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस आदत का अभी और बुरा असर दिखेगा। सीनियर गैस्ट्रोइंटोलॉजिस्ट डॉ. विनय कुमार का कहना है कि जिन बच्चों का लिवर सिर्फ फैटी है और कोई दिक्कत नहीं है। उन्हें बालरोग में ही देख लिया जाता है।