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Kanpur: जंक फूड से बच्चों के लिवर में आई बड़ों जैसी खराबी, बिगड़ी लाइफ स्टाइल और खानपान ने बिगाड़ी सेहत

Mon, 17 Oct 2022 10:29 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

सीनियर गैस्ट्रोइंटोलॉजिस्ट डॉ. विनय कुमार का कहना है कि जिन बच्चों का लिवर सिर्फ फैटी है और कोई दिक्कत नहीं है। उन्हें बालरोग में ही देख लिया जाता है। उन्हें खानपान सुधारने की राय दी जाती है। लेकिन फैटी लिवर होने के बाद जिनमें खराबी आनी शुरू हो गई है, उन्हें मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल भेजा जाता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock
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विस्तार
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कोरोना काल के बाद बच्चों के लिवर में बड़ों जैसी दिक्कत हो गई है। लिवर फैटी होने के साथ एंजाइम भी बढ़ा है। हैलट के मल्टी सुपर स्पेशियलिटी के गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभाग में औसत पांच रोगी हर ओपीडी में आ रहे हैं। बाल रोगियों की जो डायग्नोसिस तैयार की गई है, उनमें लिवर की खराबी आने के मुख्य तीन कारण मिले हैं।

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इनमें बिगड़ी लाइफ स्टाइल, खानपान में गड़बड़ी और स्ट्रेस है। कोविड कॉल के लॉकडाउन के दौरान बच्चों में खेलने कूदने आदत खत्म हुई थी, वह अभी तक नहीं सुधर पाई है। इसके साथ ही वे जंक फूड ज्यादा खा रहे हैं। इसका सारा जोर लिवर पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस आदत का अभी और बुरा असर दिखेगा। सीनियर गैस्ट्रोइंटोलॉजिस्ट डॉ. विनय कुमार का कहना है कि जिन बच्चों का लिवर सिर्फ फैटी है और कोई दिक्कत नहीं है। उन्हें बालरोग में ही देख लिया जाता है।

उन्हें खानपान सुधारने की राय दी जाती है। लेकिन फैटी लिवर होने के बाद जिनमें खराबी आनी शुरू हो गई है, उन्हें मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल भेजा जाता है। बिगड़ी लाइफ स्टाइल और खानपान के दुष्प्रभाव की यह शुरुआत है। आगे और भी दिक्कत आ सकती है।

- हैलट ओपीडी में हर महीने आते फैटी लिवर के 30 बच्चे
- सुपर स्पेशियलिटी में हर महीने आते - 20
- लिवर के बालरोगियों का आयु वर्ग आठ से 12 साल

कारण
- घर में बैठे रहना
- तनावग्रस्त रहना
- जंक फूड
- तला भुना खाना

बचाव
- मैदान में जाकर खेलें
- पूरी नींद लें
- टीवी, मोबाइल फोन कम देखें
- सादा और पौष्टिक आहार लें
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केस-01: आजादनगर के रहने वाले कक्षा छह के छात्र राकेश प्रकाश के पेट दर्द का अल्ट्रासाउंड किया गया। उसका लिवर फैटी निकला है। एसजीपीटी और एसजीओटी बढ़ी हुई आई। लॉकडाउन के बाद वह अब फुटबाल खेलने के  लिए नहीं जाता। उसे पिज्जा बहुत पसंद है। डॉक्टर ने सादा खाना खाने की सलाह दी है।

केस-02: पब्लिक स्कूल के कक्षा आठ के छात्र जितेंद्र कुमार को एक महीने से मिचली आ रही थी। जांच में लिवर फैटी के साथ एंजाइम बढ़ा है। पिता नीतेश सिंह ने बताया कि जितेंद्र ने खेलना बिल्कुल बंद कर दिया। मोबाइल गेम खेलता है। फास्ट फूड की आदत है। मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल से इलाज चल रहा है।
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