कानपुर देहात। श्रम कल्याण परिषद की ओर से पंजीकृत कारखानों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों व दुकानों में काम करने वाले श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा में सरकार मदद करेगी। योजनाओं के लाभ के लिए श्रमिकों की आमदनी प्रतिमाह 15 हजार से अधिक नहीं होनी चाहिए। श्रम विभाग के कर्मचारी पंजीकृत श्रमिकों को इसके लिए योजनाओं की जानकारी दे रहे हैं।
कोरोना काल में प्रभावित हुई योजना का लाभ फिर से देने के लिए विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। इसमें खासतौर पर श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा दिलाने पर फोकस किया जा रहा है। इसके लिए विभाग की वेबसाइट पर आवेदन किया जा सकता है। सरकार श्रमिकों के बच्चों को पढ़ाई के लिए सालाना पांच से दस हजार रुपये देगी।
जिले में करीब 62 हजार श्रमिक पंजीकृत हैं, जिनके बच्चों को इस योजना का लाभ मिलेगा। विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने योजना के क्रियान्वयन के लिए पंजीकृत श्रमिकों को सूचना देने का काम शुरू कर दिया है। श्रमिक जन सुविधा केंद्र के माध्यम से योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।
डॉ. एपीजी अब्दुल कलाम प्राविधिक शिक्षा सहायता योजना
इस योजना के तहत पंजीकृत प्रतिष्ठानों, कारखानों व दुकानों में काम करने ऐसे श्रमिकों को लाभान्वित किया जाएगा जिनका मासिक वेतन 15 हजार रुपये से अधिक न हो। इनके बच्चों को इंटमीडिएट तक की पढ़ाई करने पर पांच हजार, उच्च शिक्षा के लिए आठ हजार व प्राविधिक शिक्षा के लिए दस हजार रुपये दिए जाएंगे। इसी तरह से गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार योजना के तहत हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में 60 से 70 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले छात्र छात्राओं को पुरस्कार का प्रावधान है।
राजा हरिशचंद्र मृतक आश्रित सहायता योजना
इस योजना का लाभ लेने के लिए कारखानों में पंजीकृत श्रमिकों की मौत होने पर उनके परिवार को आर्थिक सहायता के रुप में दो लाख रुपये दिए जाने की व्यवस्था है। इसके लिए श्रमिक की मौत की तिथि से एक साल के अंदर आवेदन करना होगा। इस योजना का लाभ श्रमिक की पत्नी को दिया जाएगा। श्रमिक की आय 15 हजार रुपये मासिक से अधिक नहीं होनी चाहिए। (संवाद)
श्रमिकों की योजनाओं का प्रचार प्रसार किया जा रहा है, ताकि उनके बच्चे इसका लाभ लेकर आगे बढ़ सकें। योजना का लाभ लेने के लिए श्रम विभाग में पंजीकरण कराना जरूरी है। - विनीत त्रिपाठी, श्रम प्रवर्तन अधिकारी