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Kanpur News: बच्चा अस्पताल- न नियमित डॉक्टर आते हैं न संसाधन

Sat, 27 Jul 2024 01:54 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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- नुमाइश रोड पर बच्चा अस्पताल बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहा
- प्रतिदिन लगभग 80 से सौ मरीज आने के बावजूद एक भी नियमित डॉक्टर की तैनाती नहीं

संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। बच्चों को तत्काल बेहतर इलाज मुहैया हो सके इसके लिए नुमाइश रोड पर बच्चा अस्पताल संचालित किया गया। मौजूदा समय यहां न तो नियमित डॉक्टर की तैनाती है और न ही बिजली, पानी के पर्याप्त इंतजाम हैं। ऐसे में बीमार बच्चे को तीमारदार जिला अस्पताल व अन्य जगह लेकर जाते हैं।

शहर के नुमाइश रोड पर स्थित बच्चों का अस्पताल करीब पांच-छह साल से जिला अस्पताल खुलने के बाद से बदहाल हो गया है। जिला अस्पताल की भीड़ से बचने के लिए मरीज अपने बच्चों को दिखाने के लिए भले ही यहां ले आते हैं, लेकिन यहां जिला अस्पताल से ज्यादा परेशानी यहां उठानी पड़ जाती है।
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प्रतिदिन 80 से 100 मरीज आने के बावजूद यहां नियमित डॉक्टर की तैनाती नहीं है। हाल यह है कि आयुर्विज्ञान विवि की कमेटी की ओर से इस अस्पताल के संचालन के लिए आयुर्विज्ञान विवि से ओपीडी में डॉक्टर भेजे जाते हैं। इनका समय भी सिर्फ 10 से साढ़े 12 बजे तक सुनिश्चित किया गया।
सैफई से कभी-कभी डॉक्टर बारिश आदि समस्या की वजह से देरी से आते हैं तो ऐसे में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। शुक्रवार सुबह से ही मरीजों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। 10 बजे तक लगभग 50 मरीज आ चुके थे। इस बीच ही आयुर्विज्ञान विवि से चार ट्रेन डॉक्टर पहुंचने के बाद उपचार शुरू हो चुका।
सुबह करीब एक घंटे से इंतजार कर रहे मरीजों ने राहत पाई। हालांकि अस्पताल में बिजली चले जाने पर बाहर बरामदे में इन्वर्टर तक की व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में गर्मी और अंधेरे में मरीज और तीमारदार परेशान रहते हैं।




आधा घंटे के इंतजार के बाद आए डॉक्टर
शहर के मोहल्ला करौल निवासी शक्ति रंजन ने बताया कि उनकी छह माह की बेटी है। उसकी सुबह तबीयत खराब होने पर भीड़ से बचने के लिए बच्चा अस्पताल लेकर आए थे। सुबह लगभग साढ़े नौ बजे आने पर पता चला कि नियमित डॉक्टर नहीं हैं। आयुर्विज्ञान विवि से बदल-बदलकर डॉक्टर भेजे जाते हैं। करीब आधा घंटे बाद डॉक्टर आए तब बेटी को दिखा सके।


डेढ़ घंटे किया इंतजार...तब बेटे को दिखाया
अपने बेटे अमन को दिखाने के लिए आए सौरभ ने बताया कि वह बेटे के पेट में दर्द हो रहा था। ऐसे में सुबह साढ़े आठ बजे ही दिखाने के लिए आ गए थे। पता चला कि डॉक्टर साहब 10 बजे आते हैं। अब जिला अस्पताल जाना इसलिए ठीक नहीं समझा क्योंकि जब तक जाते और पर्चा बनवाकर लाइन में लगते तब तक काफी समय हो जाता। ऐसे यहीं इंतजार करके बच्चे को दिखाया है।
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वर्जन


जिला अस्पताल में बच्चों के इलाज की पूरी व्यवस्था है। उक्त अस्पताल पुराने समय में बच्चे के अस्पताल के रूप में था। अतिरिक्त डॉक्टर न होने की वजह से अब आयुर्विज्ञान विवि को ओपीडी की सेवा सौंप दी गई है। वहीं से डॉक्टर आते हैं।-

- डॉ. गीताराम, सीएमओ
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