सीएम ने पार्टी के वफादारों को ज्यादा तवज्जो नहीं दी
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की समाजवादी विकास यात्रा के दौरान संगठन व सरकार के बीच की ‘दूरी’ साफ नजर आई। पार्टी और सरकार के बीच चल रही तल्खी यात्रा के दौरान भी दिखी। कई ऐसे मौके आए जहां पर सीएम ने पार्टी के वफादारों को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। वहीं खुद के प्रति निष्ठा रखने वालों को पूरा सम्मान दिया।
मालूम हो कि पिछले माह सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव द्वारा सीएम अखिलेश यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर शिवपाल यादव को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद पार्टी और सरकार के बीच खासी तनातनी की खबरें कई दिनों तक चैनलों व अखबारों की सुर्खियां बनी थीं। इसी तनातनी के बीच प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री के खास समझे जाने वाले कुछ नजदीकी नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। सीएम ने इसका जवाब देने के लिए उन्हीं खास नेताओं के कंधों पर समाजवादी विकास रथयात्रा की जिम्मेदारी डाल दी। इन घटनाओं को बीते लंबा समय हो चुका है। ऊपरी तौर पर पार्टी के पदाधिकारी सब कुछ ठीक होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन गुरुवार को जनपद आई समाजवादी विकास रथयात्रा के दौरान संगठन और सरकार के बीच की दूरी एक बार फिर से साफ नजर आई। पूर्व कार्यक्रम के तहत यात्रा के जिले में इंट्री करने के बाद कई स्थानों पर रुककर सीएम को लोगों को संबोधित करना था। 13 स्थानों पर जिले के सपाइयों ने मुख्यमंत्री के स्वागत की रूपरेखा तैयार की थी। इसमें संगठन के प्रति वफादार कहे जाने वाले पदाधिकारी भी शामिल थे, लेकिन एक स्थान (नवाबगंज) को छोड़कर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अन्य किसी भी जगह पर गाड़ी से ही नहीं उतरे। सभा से लौटते समय मुख्यमंत्री बाबूगंज तिराहे पर खड़े कई नेताओं को नजर अंदाज कर हरदोई पुल से चले गए। पार्टी के वफादारों को दूर से ही हाथ हिला दिया। पार्टी के एक बड़े पदाधिकारी ने भी माना कि पूरी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री संगठन के लोगों से ‘खुले दिल’ से नहीं मिले। सारी व्यवस्था संगठन से इतर उनके अपनों के हाथ में रही।