उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश पर अवैध तरीके से चलाए जा रहे बूचड़खाने बंद किए जाने की मुहिम के साथ ही बुधवार को कस्बे में मुर्गा और बकरे के मीट के अलावा बड़े जानवरों का मीट मिलना बंद हो गया। इससे इन कारोबारियों से जुड़े कई होटल व बिरयानी की दुकानों पर भी इसका असर पड़ने लगा है।
नगर पालिका परिषद में नियमानुसार पंजीकृत मीट कारोबारियों के 11 लाइसेंसी धारक हैं। जबकि बकरे के मीट के कारोबारी मात्र तीन ही पंजीकृत हैं। वहीं, मछली की बिक्री करने वाली पांच दुकानदार पंजीकृत हैं।
इन सबका पंजीयन शुल्क 31 मार्च 2017 तक जमा है। जबकि इनके लिए पालिका परिषद ने अभी तक कई वर्षों से शुल्क लेने के बावजूद न तो अलग से दुकानें बनवाई हैं और न ही इनकी मनमानी पर कोई ध्यान दिया है। जिसकी वजह से यह अपने-अपने सुविधानुसार बकरा व बड़े जानवर का वध कर मीट बिक्री कर रहे हैं। प्रदेश सरकार के नए आदेश के साथ ही बुधवार को बकरे मीट के व्यापारियों के अलावा कस्बे में बडे़े जानवरों के मीट नहीं मिल सका। इसके शौकीन लोग व कारोबारी परेशान घूम रहे हैं। इतना ही नहीं बिरयानी के शौकीनों ने भी अब मुर्गे की बिरयानी की तरफ रुख किया है जो महंगी पड़ती है।