जिस वक्त कानपुर में कोल्ड स्टोरेज की इमारत ढही उसी समय शिवराजपुर के बोसा गांव निवासी फौजी छविराम कश्यप उधर से गुजर रहे थे। मलबे में दबे लोगों की चीख सुनकर वह अपनी जान की परवाह किए बिना उन्हें निकालने में जुट गए। कक्षा नौ में पढ़ने वाले छात्र और दो फायरकर्मियों ने भी उनका साथ दिया। उन्होंने एक-एक कर पांच लोगों को सकुशल बाहर निकाला। एक मजदूर गश खाकर गिर गया। छविराम ने उसके चेहरे पर पानी की छींटे मारीं। होश आने पर उसने सभी को भगवान का रूप बताकर शुक्रिया अदा किया।
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फौजी छविराम एमपी में तैनात हैं। इन दिनों छुट्टी पर घर आए हैं। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद वहां खड़े लोग तमाशबीन बने थे। लोगों को चीखें सुनकर उनका कलेजा कांप गया। वह खुद को रोक नहीं पाए। एक जगह रास्ता देख वह मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए भीतर घुस गए। उनका साथ फायरकर्मी नवीन कुमार, धर्मेंद्र कनौजिया और गांव में रहने वाले नौंवी कक्षा के छात्र शाहरुख ने दिया। उन्होंने मलबे में दबे पांच लोगों को एक-एक कर बाहर निकाला। फायरकर्मी और छात्र ने इन लोगों को उठाकर एंबुलेंस तक पहुंचाया। यह सभी सकुशल हैं।
बोरे हटाने में पल्लेदारों की ली गई मदद
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, देर रात तक और मजदूरों को बाहर निकलने की संभावना
मलबे से आलू के बोरे निकालने के लिए प्रशासनिक अफसरों ने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष देवेंद्र कटियार से पल्लेदारों को बुलाने के लिए कहा। काफी देर तक पल्लेदार नहीं आए तो डीएम ने नाराजगी जताई। इस पर देवेंद्र ने फौरन 50 पल्लेदार बुलाए। इन्हें राहत और बचाव कार्य के साथ आलू के बोरे हटाने के काम में लगाया गया। अफसरों का कहना था कि पल्लेदार बोरे हटाने में माहिर होते हैं, इसलिए इनकी मदद ली गई।
कोल्ड स्टोरेज और आसपास की बिजली काटी गई
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, देर रात तक और मजदूरों को बाहर निकलने की संभावना
इमारत ढहने की सूचना पर बिजली विभाग की टीम वहां पहुंची। कर्मचारियों ने धराशायी कोल्ड स्टोरेज के बिजली के तार काट दिए। साथ ही सब स्टेशन से बिजली की आपूर्ति भी बंद कार दी। इससे इलाके की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। बिजली कर्मचारियों का कहना था कि बिजली आपूर्ति बंद कराए जाने से राहत और बचाव कार्य में जुटे लोगों की जान आफत में पड़ सकती थी। कई और लोग हादसे का शिकार हो सकते थे।
टॉर्च और ड्रेगन लाइट की रोशनी में चला बचाव कार्य
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, देर रात तक और मजदूरों को बाहर निकलने की संभावना
हादसे के बाद क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बंद करा दी गई। इसके बाद भी पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने वहां लाइट व्यवस्था कराए जाने की सुध नहीं ली। नतीजा यह हुआ कि शाम को अंधेरा हो गया। पर्याप्त लाइट की व्यवस्था न होने पर राहत और बचाव कार्य प्रभावित हुआ। एनडीआरएफ और अन्य विभाग के कर्मचारी ड्रेगन लाइट और टार्च की रोशनी में मलबे में दबे लोगों को ढूंढते रहे। रात में हादसास्थल पर लाइट की व्यवस्था की गई। इसके बाद राहत और बचाव काम तेज हुआ।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, देर रात तक और मजदूरों को बाहर निकलने की संभावना
ग्राम प्रधान रामबिहारी ने बताया कि कटियार कोल्ड स्टोरेज में ठेकेदार पप्पू और अहुरी के पल्लेदार और मजदूर काम करते थे। हादसे के वक्त इमारत के भीतर कितने मजदूर और पल्लेदार काम कर रहे थे, यह साफ नहीं है। दोपहर का वक्त होने के कारण कई मजदूर इमारत के बाहर बने अस्थायी घर में खाना खाने गए थे। मलबे में दबे मजदूरों और पल्लेदारों की संख्या को लेकर अफसर भी निरुत्तर हैं।