रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, देर रात तक और मजदूरों को बाहर निकलने की संभावना
कानपुर शिवराजपुर इलाके के आसपास के गांवों में अचानक सांस के मरीजों की परेशानियां बढ़ गई हैं। नाक-गला चोक और फेफड़ों में सूजन की शिकायत लेकर लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। शिवराजपुर में कटियार कोल्ड स्टोरेज हादसे के बाद अमोनिया गैस के रिसाव को रोकना मुश्किल होता जा रहा है। अंदर फंसे लोगों को ‘अमोनिया गैस प्वाइजनिंग’ हो गई है ऐसे में दबे सभी मजदूरों की जान जा सकती है। रेस्क्यू के दौरान बाहर निकाले गए घायलों को हैलट में भर्ती कराया गया है। जहां घायलों में अमोनिया गैस प्वाइजनिंग की पुष्टि हुई है। इसके चलते घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों का दावा है कि अमोनिया से दम घुटने के चलते ही कर्मचारियों की मौत हुई है। पोस्टमार्टम के बाद ही मौत की वजह साफ होगी।
घायलों को सांस लेने में परेशानी
घायलों को सबसे ज्यादा सांस लेने में हो रही है परेशानी
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नवनीत कुमार ने बताया कि अमोनिया गैस शरीर के अंदर जाने से घायलों का गला चोक होने के साथ ही फेफड़ों में सूजन और जहर फैल गया है। इसे अमोनिया गैस प्वाइजनिंग भी कहते हैं। जिससे घायलों को सांस लेने में भी परेशानी हो रही है। शरीर में गंभीर चोटों के साथ ही सांस लेने में परेशानी होने से घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है। वहीं गैस के दुष्प्रभाव से कोल्ड स्टोरेज में फंसे लोगों के आंखों में भी संक्रमण हो गया है। घायलों के इलाज के लिए सर्जरी विभाग के प्रभारी डॉ. संजय काला, मेडिसिन विभाग से डॉ. संजय अग्रवाल, डॉ. विशाल गुप्ता, चेस्ट हॉस्पिटल, आई डिपार्टमेंट के साथ ही अन्य डॉक्टरों की टीम घायलों के इलाज में लगी हुई हैं।
क्या है अमोनिया
मौके पर सेना के जवान
अमोनिया एक तीक्ष्ण गंध वाली रंगहीन गैस है। यह हवा से हल्की होती है और इसका वाष्प घनत्व 8.5 है। यह जल में अति विलेय है। अमोनिया के जलीय घोल को लिकर अमोनिया कहा जाता है। यह क्षारीय प्रकृति का होता है। यूरिया, अमोनियम सल्फेट, आदि रासायनिक खादों को बनाने में अमोनिया का उपयोग किया जाता है। बर्फ के कारखाने में शीतलक के रूप में अमोनिया का उपयोग किया जाता है। थोड़ी ज्यादा मात्रा में अमोनिया सूंघने पर जान जा सकती है। 1984 में भोपाल गैस त्रासदी इसका बड़ा उदाहरण है।
उपयोग
यूरिया, अमोनियम सल्फेट, अमोनियम फास्फेट, अमोनियम नाइट्रेट आदि रासायनिक खादों को बनाने में अमोनिया का उपयोग किया जाता है। बड़े पैमाने पर नाइट्रिक एसिड तथा सोडियम कार्बोनेट के निर्माण में इसका उपयोग किया जाता है। कोल्ड स्टोरेज के अलावा प्रयोगशाला में प्रतिकारक के रूप में इसका उपयोग किया जाता है। लिकर अमोनिया का उपयोग कपड़ों से तेल ग्रीज आदि के दाग को छुड़ाने के लिए किया जाता है। अमोनियम कार्बोनेट बनाने में इसका उपयोग किया जाता है। अपने अत्यधिक उपयोग के कारण पूरी दुनिया में इसका व्यापक पैमाने पर उत्पादन होता है। 2004 में पूरे विश्व में इसका आनुमानिक उत्पादन 10 करोड़ 90 लाख टन हुआ था। साल 2006 में इसका उत्पादन लगभग 14 करोड़ 65 लाख टन हुआ है। अमोनिया उत्पादन में भारत का स्थान चीन के बाद द्वितीय है।
इससे बचने के उपाय
किसी उद्योग या अमोनिया टैंक से अमोनिया का रिसाव होकर यदि अचानक अमोनिया वातावरण में फैल जाए तो आँख तथा चेहरे को काफी अधिक पानी के द्वारा धोना चाहिए। अमोनिया जल में अति विलेय है इसलिए चेहरे को जल से धोने से यह घुलकर अलग हो जाती है।