एक साल बाद भी क्वालिटी में कोई कमी नहीं आई
इसमें विटामिन ए के साथ मैग्नीशियम, आयरन, जिंक और आयोडीन भी शामिल किया जा सकता है। इसे लिक्विड और दानों के रूप में तैयार किया गया। लो जीआई शुगर बनाकर इसे एक साल रखा गया, तो इसकी क्वालिटी में कोई कमी नहीं आई। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के प्रावधानों के लिहाज से इसे भविष्य में और पौष्टिक बनाया जाएगा।
सामान्य चीनी की तुलना में 20 फीसदी तक महंगी होगी
निदेशक प्रोफेसर नरेंद्र मोहन ने बताया कि ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्राल नियंत्रित होने से लोग हार्ट अटैक से बचेंगे। लो जीआई शुगर की कीमत सामान्य चीनी तुलना में 20 फीसदी तक महंगी होगी। इसके अलावा लोग शुगर फ्री के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान से महफूज रहेंगे। इस संबंध में विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही एडवाइजरी जारी कर चुका है।
ग्लाइसेमिक इंडेक्स 55 से कम
लो जीआई शुगर का ग्लाइसेमिक इंडेक्स का मान 55 से कम रहेगा। सामान्य चीनी के ग्लाइसेमिक इंडेक्स का मान 70 या इससे ऊपर होता है और मध्य जीआई का मान 56 से 69 के बीच होता है। 55 से कम जीआई वाले खाद्य पदार्थ के सेवन से ब्लड शुगर लेवल का स्तर बहुत कम बढ़ता है।
ऐसे नियंत्रित रहेगा ब्लड शुगर लेवल
लो जीआई शुगर में स्टीविया, विटामिन और मोंक फ्रूट का घोल मिलाया जाता है। इससे मास्किंग ऑफ शुगर हो जाती है। इससे लो जीआई शुगर बहुत धीरे-धीरे हजम होती है। इसका असर ब्लड शुगर लेवल पर नहीं आता। सामान्य चीनी तुरंत हजम हो जाती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। ब्लड शुगर नियंत्रित रहने से ये वसा में परिवर्तित नहीं होगी। इससे लिवर फैटी होने से बचा रहेगा।
वर्ष 2017 में यह ख्याल आया था कि अगर ग्लाइसेमिक इंडेक्स घटा दिया जाए, तो चीनी का असर ब्लड शुगर लेवल पर नहीं आएगा। एनएसआई में आने के बाद निदेशक प्रोफेसर नरेंद्र मोहन के निर्देशन में काम शुरू किया। शोध में अन्य लोग भी शामिल रहे। खुद चीनी खाकर ब्लड शुगर लेवल की जांच करते रहे। आखिरकार सफलता मिली। -अनुष्का कनौडिया, सीनियर रिसर्च फैलो