केंद्र सरकार द्वारा एनडीटीवी पर एक दिन की बंदी के आदेश को प्रगतिशील लेखक संघ ने फासिस्टी करतूत बताया है। कहा है कि बंदी वाला दिन 9 नवंबर (बुधवार) काला दिवस होगा। यह एक दिन से हजारों दिन की शुरुआत हुई है।
प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव राजेंद्र राजन द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा है कि मामला किसी एक या दो टीवी चैनलों अथवा अखबारों या पुस्तकों को प्रतिबंधित करने का नहीं है। बल्कि यह प्रमाण है कि अब देश में फासिस्टी ताकतें उफान पर हैं। लेखकों के राग दरबारी नहीं बनने पर उन्हें मौत के घाट उतारा जा रहा है। उनकी कलमें छीनी जा रही हैं। गला दबाकर बोलती बंद की जा रही है।
सार्वजनिक प्रजातांत्रिक संस्थाओं पर संघी नियंत्रण स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट है कि सरकार स्वतंत्र चिंतन और अभिव्यक्ति के संवैधानिक अधिकार को दफनाने में लग गई है। फासिस्ट तंत्र आरएसएस के एजेंडा के अनुसार देश में सरकारी तंत्र से जुड़ कर बर्बर युग की शुरुआत कर दी गई है।
श्री राजन ने साहित्यिक, सांस्कृतिक और मीडिया संगठनों से अपील की है कि वह 9 नवंबर को प्रतिरोध दिवस मनाएं। श्री राजन ने महान कवि मुक्तिबोध की कविता का हवाला भी दिया है। उनकी जन्म शताब्दी इसी माह 13 नवंबर को है।