कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स की ओर से सर्टिफिकेट कोर्स मूर्तिकला एवं पॉटरी टेराकोटा शुरू हुआ है। यह कला के साथ-साथ आर्ट थेरेपी के माध्यम से सकारात्मक जीवनशैली की ओर प्रेरित करेगा।
निदेशक डॉ. मिठाई लाल ने बताया कि मिट्टी के साथ सृजनात्मक कार्य करने से व्यक्ति की कल्पनाशक्ति, एकाग्रता, आत्मविश्वास और भावनात्मक संतुलन का विकास होता है। कोर्स समन्वयक जीऊत बली यादव ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को पॉटरी, टेराकोटा, सिरेमिक कला, मूर्ति निर्माण, पोर्ट्रेट मॉडलिंग और क्राफ्ट निर्माण का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा। कोर्स की आयु की कोई सीमा नहीं है। न्यूनतम योग्यता हाईस्कूल निर्धारित है और कोर्स शुल्क 17,200 रुपये है।