सोने की तस्करी को हतोत्साहित करने और राजस्व बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार बड़ा कदम उठा सकती है। सरकार सोने पर लगने वाले आयात शुल्क को 10 फीसदी के बजाय चार फीसदी करने पर विचार कर रही है। इसके अलावा सोने पर लगने वाले तीन फीसदी जीएसटी को भी घटा सकती है।
सराफा से जुड़े सूत्रों ने बताया कि बृहस्पतिवार को केंद्रीय अप्रत्यक्षकर एवं सीमा शुल्क बोर्ड के अफसरों की समीक्षा बैठक दिल्ली में हुई थी। इसमें आयात शुल्क को तर्क संगत बनाने पर चर्चा की गई। दरअसल सरकार सोना-चांदी को एक अलग उद्योग बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए फरवरी महीने में स्वर्ण नीति बनाने की घोषणा की गई थी।
सोने से राजस्व पाने की अभी भी व्यापक संभावनाएं
सोना तस्करी करने वाला गिरफ्तार
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इसके अलावा सराफा के साथ मिलकर सरकार ने गोल्ड काउंसिल का भी गठन किया था। सोने से राजस्व पाने की अभी भी व्यापक संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र में और अधिक संख्या में न केवल सराफा का पंजीकरण हो सकता है बल्कि राजस्व भी मिलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि तस्करी के जरिये बाजारों में आने वालों पर कड़ाई की जाए।
इसके लिए यदि आयात शुल्क कम कर दिया जाता है तो इसमें कमी आने की संभावना है। इंडिया बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन उप्र के निदेशक पंकज अरोड़ा ने बताया कि सरकार इस दिशा में काम कर रही है। सरकार का यह अच्छा कदम है। आयात शुल्क कम होगा तो बाजारों में तस्करी से आने वाले सोने को रोका जा सकेगा।
इसलिए ऐसा कर रही है केंद्र सरकार
सोने के बिस्कुट बरामद
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सूत्रों ने बताया कि एक किलो सोना का भाव करीब 32 लाख (मौजूदा कीमतों के अनुसार) है। 10 फीसदी आयात शुल्क लगने के कारण 3 लाख 20 हजार रुपये सराफा को चुकाने पड़ते हैं। जबकि तस्करी से आने वाले सोने पर कोई टैक्स नहीं देना होता है। यह सराफा को बड़ा मुफीद लगता है।
शहर भी है तस्करी का बड़ा गढ़
शहर में छोटे-बड़े करीब दो हजार से ज्यादा सराफा हैं। जो पूरे शहर भर में फैले हैं। शहर से दो सौ किलोमीटर की दूरी वाले जिलों में यहां से सोना आदि की सप्लाई की जाती है। सूत्रों का कहना है कि शहर में भी कोलकाता के जरिये बड़े पैमाने पर तस्करी की जाती है। हालांकि चुनाव के चलते इस पर काफी हद तक लगाम लगी है, लेकिन सख्ती कम होते हुए ही फिर तस्करी शुरू हो जाएगी।