वहीं, जब पुलिस ने फोरेंसिक टीम की मदद से लॉकरों की जांच की तो सभी में लोहे का बुरादा मिला, जो लॉकर में ड्रिल मशीन चलाते वक्त अंदर ही रह गया था। फोरेंसिक ने लॉकरों से रिपिट, नट-बोल्ट भी जुटाए हैं, जो लॉक में लगे थे और उसे खोलते वक्त अंदर ही छूट गए थे।
पुलिस का मानना है कि इस तरह के लॉक को खोलने के लिए तकनीक की जरूरत होती है, जो सिर्फ लॉक बनाने वाले या उसकी मरम्मत करने वालों के पास ही होती है। ऐसे में लॉकर रूम में ऑपरेट न होने वाले 50 लॉकरों को खोलने के लिए दिसंबर 2021 में दो दिनों तक अंदर जाने वाले कंपनी के आधा दर्जन कर्मचारियों से लेकर लॉकर इंचार्ज शुभम मालवीय और तत्कालीन बैंक मैनेजर रामप्रसाद भी शक के दायरे में आ चुके हैं।
फोरेंसिक एक्सपर्ट के अनुसार लॉकर खोलने के लिए बदमाशों ने किसी भी तरह की ठोक पीट नहीं की। सिर्फ तकनीक का इस्तेमाल कर लॉकर खोले गए। वहीं, लॉकर इंचार्ज शुभम मालवीय दो दिनों के अवकाश पर थे, गुरुवार को उन्हें बैंक लौटना था लेकिन वह नहीं लौटे।
जब लॉकर खोले तो क्यों नहीं कराई वीडियोग्राफी
शकुंतला देवी के बैंक लॉकर से भी चोरों ने 30 लाख के गहने पार कर दिए थे। उनके बेटे सीए एसके पोद्दार के अनुसार सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की ओर से भारी चूक हुई है। आरबीआई की गाइड लाइन के अनुसार यदि कोई बैंक लंबे समय से बंद लॉकरों को खुलवाने की प्रक्रिया करती है, तो उसे इसकी वीडियोग्राफी भी करानी चाहिए, जबकि सेंट्रल बैंक की तरफ से न तो वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराई जा सकी और न ही सीसीटीवी कैमरों के फुटेज।
लॉकर रूम के बाहर कैमरा लगा होता है। अंदर कर्मचारियों ने कितने लॉकर खोले और बंद किए यह किसी ने नहीं देखा। इस संबंध में उन्होंने पुलिस कमिश्नर से भी शिकायत की है।
क्राइम ब्रांच ने डंप किया मोबाइल टॉवर
वारदात की जांच क्राइम ब्रांच के पाले में जा चुकी है। क्राइम ब्रांच की सर्विलांस सेल ने बुधवार को बैंक पहुंच कर लैपटॉप और डिवाइस की मदद से आसपास के मोबाइल टॉवर (बीटीएस) डंप किए हैं। लाखों नंबरों में से संदिग्ध नंबरों को छांट कर उनकी मदद से बदमाशों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।
हमने जांच शुरू कर दी है। बीटीएस डंप कराया गया है। जांच में जो भी संदिग्ध पाए जाएंगे उनसे पूछताछ की जाएगी। जल्द ही घटना का खुलासा किया जाएगा। - सलमान ताज पाटिल, डीसीपी क्राइम