ग्लोबल कप्बेलिटी सेंटर इनोवेशन समिट के बारे में वार्ता करते दीपक, जय शंकर शर्मा, बबीता रोहानी।
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कानपुर। प्रदेश के स्टार्टअप को ग्लोबल पहचान दिलाने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से आईआईटी कानपुर में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) स्थापित किया जाएगा।
इसमें प्रदेश सरकार का भी सहयोग रहेगा। यह जानकारी आईआईटी कानपुर एलुमिनाई एसोसिएशन, बेंगलुरू चैप्टर के मेंटर और स्टार्टअप मास्टर क्लास के चेयरपर्सन जय शंकर शर्मा ने संस्थान में आयोजित जीसीसी इनोवेशन समिट 2025 में दी।
उन्होंने कहा कि जीसीसी में स्टार्टअप की संख्या बढ़ाने में सरकार का काफी बड़ा रोल है। कार्यक्रम में आए प्रदेश के प्रमुख सचिव प्लानिंग आलोक कुमार और निवेश यूपी के सीईओ विजय किरन आनंद ने सहयोग का आश्वासन दिया।
जीसीसी इनोवेशन समिट 2025 से पहले जय शंकर शर्मा, आईआईटी कानपुर एलुमिनाई एसोसिएशन की एडमिन हेड बबिता लोहानी व दीपक कुमार ने प्रेसवार्ता के दौरान जीसीसी की स्थापना के महत्व की जानकारी दी। जयशंकर ने बताया कि जीसीसी की मदद से कोई भी छोटी कंपनी वैश्विक पहचान पा सकती हैं। साथ ही एमएनसी को आने वाली परेशानियों को दूर करने में रिसर्च वर्क भी कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि देश में 1800 से अधिक जीसीसी हैं। इसमें अकेले बंगलूरू में 900 जीसीसी हैं। एनसीआर में करीब 100 और यूपी में इनकी संख्या केवल 10 है। उन्होंने कहा कि बंगलूरू में सरकार स्वयं इंडस्ट्री के पास आती है।
बबिता लोहानी ने कहा कि उप्र में सर्वाधिक संभावनाएं हैं इसलिए यहां सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की अधिक आवश्यकता है। जय शंकर शर्मा ने बताया कि जीसीसी दो प्रकार के स्टार्टअप का चयन करती है। पहला वह जिन्हें अपने उत्पाद या तकनीक के लिए मेंटर और वित्तीय बजट की जरूरत होती है। दूसरे रिसर्च और स्टार्टअप होते हैं। पूरे देश में जीजीसी अभी कर्नाटक, यूपी, एमपी, गुजरात में हैं। अभी इसके लिए नेशनल लेवल की कोई पॉलिसी नहीं आई है।