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Kanpur: महाराष्ट्र मंडल का शताब्दी वर्ष समारोह, राजेंद्र अर्लेकर बोले- कहीं भी जाएं खुद को भारतीय समझें

Sat, 17 Feb 2024 12:42 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: महाराष्ट्र मंडल के शताब्दी वर्ष समारोह में बिहार के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने कहा कि मराठी मानुस को अपने महाराष्ट्र की नाल को नहीं तोड़ना है। वह जब बिहार के राज्यपाल बने और प्रधानमंत्री मोदी जी से मिलने गए थे, तो उन्हें बिहारी बाबू कहकर संबोधित किया गया था।
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महाराष्ट्र मंडल का शताब्दी वर्ष समारोह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत में कहीं भी जाएं, खुद को भारतीय समझें। यह एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना है। मराठी उत्तर भारत में आ गए हैं। उनकी भाषा और संस्कृति में दिखाई देने लगा है, लेकिन महाराष्ट्र से अपने जुड़ाव को न भूलें। यह बात बिहार के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने कही। वह शनिवार को महाराष्ट्र मंडल के शताब्दी वर्ष समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।

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उन्होंने कहा कि मराठी मानुस को अपने महाराष्ट्र की नाल को नहीं तोड़ना है। वह जब बिहार के राज्यपाल बने और प्रधानमंत्री मोदी जी से मिलने गए थे, तो उन्हें बिहारी बाबू कहकर संबोधित किया गया था। यह उस लिए क्योंकि वह अभी बिहार की संस्कृति और सभ्यता से जुड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष समारोह मनाना हर्ष की बात है। यह किसी एक का कार्य नहीं है, बल्कि कई लोगों की मेहनत लगी हुई है।

कई संस्थाएं ऐसी हैं, जिनका उद्धघाटन तो हुआ, लेकिन उनका पता नहीं है। आज महाराष्ट्र मंडल के 100 वर्ष हो गए हैं। इसका सिंहावलोकन करने की जरूरत है। आगे क्या-क्या करना हैख् उसकी रणनीति तय करनी होगी। राज्यपाल के मुताबिक उनका लखनऊ में कार्यक्रम था, लेकिन कानपुर के समारोह के बारे में पता चला, तो वह एक दिन पहले ही चले आए। आज सिर्फ आए हैं। अगली बार भोजन करने आएंगे।

महाराष्ट्र भवन में हुए रंगारंग कार्यक्रम, छात्र-छात्राओं ने प्रस्तुत किए मनमोहक नृत्य
महाराष्ट्र मंडल के शताब्दी वर्ष समारोह का शनिवार का रंगारंग आगाज हो गया। छात्र-छात्राओं ने मनमोहक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना के साथ हुई। इसके बाद छात्राओं और महिलाओं ने लावणी नृत्य प्रस्तुत किया। समारोह में मंडल के अध्यक्ष श्रीकांत डबली ने राज्यपाल को श्रीराम मंदिर का मॉडल दिया, जबकि संजय फड़के ने उनको शाल उड़ा कर स्वागत किया।
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श्रीनिवास बालाजी हार्डिकर की पुस्तक का हुआ विमोचन
कार्यक्रम में क्रांतिकारी, शिक्षक और साहित्यकार रहे श्रीनिवास बालाजी हार्डिकर की पुस्तक सत्तावनी क्रांति का विमोचन किया गया। यह पुस्तक का संकलन उनके पुत्र अरुण और अजय हार्डिकर ने किया। उन्होंने बताया कि श्रीनिवास बालाजी साहित्यकार, शिक्षक के साथ ही अच्छे ज्योतिष रहे हैं। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के समय बहुत सी रचनाएं लिखीं। उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हुई है। सरकार की ओर से उन्हें कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
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